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गुरुवार, 11 जून 2026

UP K Benaras में मांस-मछली की दुकानों के विस्थापन का विरोध

विस्थापन के मुद्दे पर सड़क पर उतरे हिंदू सामाजिक कार्यकर्ता, एसडीएम को दिया ज्ञापन 

ऐलान: निगम के निर्णय से हजारों मल्लाहों, बंगाली समाज, अघोर परंपरा, मुस्लिम समुदाय और गरीब व्यापारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। स्वच्छता और सुंदरीकरण की आड़ में गरीबों की रोजी-रोटी छीनने और बनारस के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।


  • मोहम्मद रिजवान 

dil india live (Varanasi). वाराणसी शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर निगम ने शहरी क्षेत्र से मांस, मछली और मुर्गे की दुकानों को स्थानान्तरित करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के विरोध में सामजिक संगठन सड़क पर उतर आए हैं। मज़े की बात तो यह है कि इसमें मुस्लिम नहीं बल्कि अधिकांश हिंदू सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। इस दौरान साझा संस्कृति मंच के बैनर तले जुटे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर मार्च निकाल कर जिलाधिकारी को संबोधित मांगों का ज्ञापन एसडीएम शिवानी सिंह को सौंपा। 

ज्ञापन सौंपने के बाद कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधि मंडल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि स्वच्छता के नाम पर कॉर्पोरेट को फायदा पहुँचाने की साज़िश की जा रही है। इस निर्णय से हजारों मल्लाहों, बंगाली समाज, अघोर परंपरा, मुस्लिम समुदाय और गरीब व्यापारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। नगर निगम के निर्णय को एकतरफा बताते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वच्छता और सुंदरीकरण की आड़ में गरीबों की रोजी-रोटी छीनने और बनारस के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

अन्य वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ गरीब खुदरा दुकानदारों को उजाड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़े होटलों, मॉल्स और जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को धड़ल्ले से मांस-मछली बेचने की खुली छूट है। यह साफ तौर पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति का मोहरा बनाकर गरीब व्यापारियों को तबाह करने और पूरा बाजार कॉर्पोरेट घरानों की झोली में डालने का खेल है।

औघड़-तांत्रिक साधना में मांस का धार्मिक महत्व
पत्रकारों से नेताओं ने कहा कि बनारस सिर्फ एक शहर नहीं, एक साझी संस्कृति है। यहां मल्लाह समाज की पीढ़ियों की आजीविका मछली मारने और बेचने पर टिकी है। शहर में रहने वाले लगभग एक लाख बंगाली समाज के खान-पान और पूजा-पाठ के रीति-रिवाजों में मछली अनिवार्य हिस्सा है। यही नहीं, बनारस की प्राचीन औघड़-तांत्रिक साधना में भी मांस का धार्मिक महत्व है।

समाधान विस्थापन नहीं नियमन 
कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि हम बनारस के ही बाशिंदे है और स्वच्छता के विरोधी नहीं हैं। सरकार को अगर समस्या खुले में मांस काटने से है, तो इसका समाधान विस्थापन नहीं बल्कि नियमन है। नगर निगम दुकानों को आधुनिक बनाए, काले, रंगीन शीशे और रेफ्रिजरेशन की व्यवस्था अनिवार्य करे, लेकिन रोजगार न छीने। 

प्रतिनिधि मंडल में सतीश सिंह, रामजन्म यादव, डॉ. अनूप श्रमिक, संजीव सिंह, विनय राय मुन्ना, नेविश, अब्दुल्ला, नीरज, अनंत, डॉ. छेदी लाल निराला व मनीष शर्मा आदि शामिल रहे।