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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

karwachauth: साजन के लिए सजने संवरने का चला देर रात तक दौर, कल सुहागिन महिलाएं चांद देखकर तोड़ेंगी व्रत

करवा चौथ न्यूज़ 2026 वाराणसी
करवा चौथ पर सुहागिन महिला चलनी में चांद देखते हुए (फाइल फोटो)

@dil india live 

(Varanasi). करवा चौथ कल है, मगर तैयारियां सप्ताह भर पहले से ही शुरू हो गई थी। सजना के लिए सजने संवरने का दौर बुधवार को देर रात तक चलता रहा। सुहागिन महिलाएं चलनी में अपना चांद देखकर व्रत तोड़ेंगी।

जानिए कब है करवा चौथ 

सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व करवा चौथ इस साल गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। 28 अक्टूबर को लेकर जो कन्फ्यूजन था, वो पंचांग ने साफ कर दिया है। चांद का व्रत होने से चतुर्थी तिथि चंद्रोदय के समय होनी चाहिए, जो 29 अक्टूबर को ही है हालांकि आज रात से ही बाजारों में मेहंदी, चूड़ी और सरगी की रौनक बढ़ गई है।

करवा चौथ 2026 शुभ मुहूर्त

- तिथि: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

- चतुर्थी तिथि शुरू: 29 अक्टूबर रात 01:06 बजे से

- चतुर्थी तिथि खत्म: 29 अक्टूबर रात 10:09 बजे तक

- व्रत का समय: सुबह 06:31 बजे से रात चांद निकलने तक

- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से 06:56 बजे तक

चांद निकलने का समय

दिल्ली में 08:17 बजे, वाराणसी / लखनऊ में 08:06 बजे के आसपास, कोलकाता में 07:47 बजे।


क्यों मनाया जाता है करवा चौथ?

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ये व्रत रखा जाता है। 'करवा' का मतलब होता है मिट्टी का छोटा बर्तन और 'चौथ' मतलब चतुर्थी।

मान्यता है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता की पूजा करती हैं और चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।



ये पर्व उत्तर भारत: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

व्रत की विधि और कथा का महत्व

  • सरगी: सुबह सूरज निकलने से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसमें फल, मिठाई, सेवईं होती है।
  • निर्जला व्रत: महिलाएं पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहती हैं।
  • सोलह श्रृंगार: लाल, मरून रंग के कपड़े, मेहंदी, सिंदूर करके शाम को पूजा होती है।
  • व्रत कथा: करवा माता की कथा सुने बिना व्रत अधूरा माना जाता है। कथा में करवा नाम की पतिव्रता महिला की कहानी है जिसने अपने पति को यमराज से बचाया था। शाम को चांद निकलने पर पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाता है।