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(Varanasi)। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के महाराजा (डॉ.) विभूति नारायण सिंह गंगापुर परिसर स्थित ललित कला विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘शुभारंभ-2026’ कला मेला एवं सांस्कृतिक उत्सव का समापन समारोह संपन्न हो गया। समारोह में कला, संस्कृति, रचनात्मकता, पारंपरिक शिल्प एवं विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए सभी को पुरस्कार एवं सम्मान दिया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग थे, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने की। विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ. दीप्ति मिश्रा उपस्थित रहीं। इस अवसर पर गंगापुर परिसर के प्रभारी डॉ. मनीष कुमार सिंह सहित सभी अध्यापकों एवं गैरशैक्षणिक कर्मचारियों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
कला शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने पर बल
मुख्य अतिथि डॉ. पृथ्वीश नाग ने अपने संबोधन में कला को समाज की सांस्कृतिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि गंगापुर परिसर में इस प्रकार के आयोजन ने उन्हें भावविभोर कर दिया। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए व्यापक मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कला शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रस्तुति की नवीनता अकल्पनीय
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सृजनात्मकता, नवाचार और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि यहां का आयोजन विद्यर्थियों के वित्तीय सहयोग द्वारा किये जाने से विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। ललित कला के विद्यार्थियों की मंचीय प्रस्तुति में मौलिक नवाचार के समावेश होने से वे अति प्रसन्न और भावुक दिखे। इन्होंने कहा कि मेरे विगत 40 वर्षों के अपने अनुभव में यहां के बच्चों की प्रस्तुति की नवीनता अकल्पनीय है। कला एवं संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया तथा ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार
गंगापुर परिसर के प्रभारी डॉ. मनीष कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने आयोजन की सफलता में योगदान देने वाले शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
तीन दिवसीय ‘शुभारंभ-2026’ कला मेला एवं सांस्कृतिक उत्सव के अंतर्गत कला प्रदर्शनी, हस्तनिर्मित वस्तुओं एवं कलाकृतियों के स्टॉल तथा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। उत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों की कलात्मक अभिरुचि, रचनात्मक सोच और भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रति जुड़ाव को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया। कला एवं शिल्प से संबंधित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को अपनी सृजनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. अम्बरीश राय, सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, विद्यार्थी तथा अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सुमित कुमार घोष ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन सचिव डॉ. शशि कांत नाग ने कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी विद्यार्थियों, शैक्षणिक सदस्यों, परिसर में सेवारत सभी कर्मचारियों, सुरक्षकर्मियों, एवं मीडिया का धन्यवाद ज्ञापित किया। सह-संयोजक गौरव दूबे एवं परामर्शदात्री डॉ. अर्चना पांडेय का मार्गदर्शन आयोजन को व्यवस्थित रूप देने में महत्वपूर्ण रहा।
चर्चा में रहा अनोखा फैशन शो
‘शुभारंभ-2026’ कला मेला एवं सांस्कृतिक उत्सव का समापन कला, संस्कृति और सृजनात्मकता के महत्व को रेखांकित करते हुए हुआ। जिसमे गौरवशाली छठ पूजा का नाट्य प्रस्तुति अत्यंत संवेदनशील रहा। शिव आराधना, एवं एक अनोखा रैंप वाक हुआ जिसमे मंत्रोच्चार के ध्वनि के साथ शिव पार्वती, राम सीता, राधा कृष्ण, मीरा, द्रौपदी, रावण,पृथ्वी, अन्नपूर्णा, सरस्वती, छिन्नमस्ता, दुर्गा आदि स्वरूपो में विद्यार्थियों ने प्रस्तुति दी।
प्रदर्शित शिल्पों में महाराजा विभूति नारायण सिंह की बैठी हुई मुद्रा में मूर्ति, गत्ते से बनी विशालकाय गरुड़ की आकृति, पुराने टॉयर के कतरन से तैयार मोर और डायनासोर औऱ धागे से निर्मित पोट्रेट शिल्प ने सभी का ध्यान आकृष्ट किया। विद्यार्थियों में आकाश, वर्षा, प्रकांक्षा, रोशनी, प्रिया, श्वेता, शिवम्, भूपेश, पल्लवी, ऋषभ अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। इस अवसर पर परिसर के समस्त सम्मानित अध्यापक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।







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