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बुधवार, 1 जुलाई 2026

Doctors day 2026: सफेद कोट के पीछे छुपे हौसले, उम्मीद और सेवा के जज़्बे को Salam

कैलेंडर की तारीख ही नहीं हजारों घरों की उम्मीद की वजह हैं डाक्टर


dil india live (Varanasi) Varanasi Doctors day news 1 जुलाई 2026 यानी आज राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (National Doctors day) है। यूं तो कैलेंडर की एक तारीख है, लेकिन हजारों घरों में उम्मीद की वजह भी है। डॉ. विधान चंद्र रॉय की याद में मनाया जाने वाला यह दिन उन हाथों को समर्पित है जो दर्द कम करते हैं और उन आँखों को, जो मरीज़ में सिर्फ केस हिस्ट्री नहीं, एक ज़िंदगी देखती हैं।


जब त्योहारों पर भी ड्यूटी ही परिवार 

डॉ. नेहा सुबह 6 बजे से खड़ी हैं। "बेटे का पहला जन्मदिन था, पर एक्सीडेंट केस आ गया। वो कहती हैं कि हमारा पेशा ऐसा है जहां 'मुझे देर हो जाएगी' कहने का मौका नहीं मिलता", वो मुस्कुरा कर कहती हैं। सफेद कोट पर लगा नेमप्लेट शायद उनका नाम बताता है, पर उनके मरीज़ उन्हें 'भगवान' कहकर बुलाते हैं।ये एक अजीब सी खुशी देता है। दरअसल डा. नेहा तो एक मिसाल है इनके जैसी सैकड़ों डाक्टर ऐसे हैं जो पहले अपने फर्ज पर फोकस करते हैं उसके बाद घर, परिवार और मित्र मंडली।

कोविड के वो दिन, भूलते नहीं

पूर्व अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आरवी दुबे याद करते हैं, "पीपीई किट में 12 घंटे, चेहरा छिपा। मरीज़ चिकित्सकों का चेहरा नहीं देख पाते थे, बस आवाज़ सुनकर भरोसा कर लेते थे। कई बार लगा कि अब ड्यूटी नहीं होगी, पर फिर किसी मरीज़ का 'थैंक यू डॉक्टर साहब' सुनकर सब थकान उतर जाती थी।" डाक्टर दुबे कहते हैं उनके वाराणसी आवास पर आज भी गाजीपुर, सैदपुर, मऊ व आजमगढ़ से लोग आते हैं तो कोविड काल की यादें ताजा हो जाती है जब डाक्टरों की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा थी।

गांव से शहर तक, एक ही जज़्बा

डॉ. शबाना बताती हैं कि कैसे रात 2 बजे डिलीवरी के लिए साइकिल से 5 किमी चलकर आई महिला का दर्द उन्होंने कम किया। "जब उस बच्ची की किलकारी गूंजी, तो लगा कि सारी रात का जागरण सफल हो गया। हम डॉक्टर नहीं, कई बार माँ-बाप-बहन सब बन जाते हैं।"

सिर्फ इलाज नहीं, रिश्ता निभाते हैं  
डाक्टर आरवी दुबे कहते हैं आज के दिन बड़े अस्पतालों में सम्मान समारोह होंगे, माला पहनाई जाएगी। पर असली सम्मान वो है जब कोई मरीज़ सालों बाद भी रास्ते में रोककर कहे - "डॉक्टर साहब, आपकी वजह से आज ज़िंदा हूँ।" 

डाक्टर हम्ज़ा कहते हैं कि डॉक्टर सिर्फ दवा नहीं लिखते, वो टूटे हुए हौसले जोड़ते हैं। नींद कुर्बान करते हैं ताकि कोई चैन से सो सके। त्योहार, छुट्टी, अपनों का साथ - सब मरीज़ की एक आवाज़ पर छोड़ देते हैं। आज इस सफेद कोट को सलाम। उस स्टेथोस्कोप को सलाम जो धड़कनों की भाषा समझता है। और उस जज़्बे को सलाम जो कहता है - "मरीज़ पहले, मैं बाद में।"

Happy Doctors day.

आप हैं तो उम्मीद ज़िंदा है। 

doctors day सेलीब्रेशन का आयोजन 1 July को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के लहुराबीर आफिस में किया गया। आयोजन में आईएमए के तमाम सदस्य, अन्य चिकित्सक जुटे। इस मौके पर बेहतर काम करने वाले doctors का सम्मान किया गया। नीचे देखें तस्वीरों में...





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