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रविवार, 9 अप्रैल 2023

World homoeopathic day (10 april)

मीठी गोलियां नहीं किसी से कम, बच्चों का नहीं फूलने देती दम

 • निमोनिया ही नहीं अन्य बीमारियों में भी कारगर है होम्योपैथी

 • बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने में भी होती है मददगार


Varanasi (dil india live). होम्योपैथ की नन्हीं-मिठी गोलियों को किसी से कम न आकिये। यह सिर्फ बड़ों में ही नहीं बच्चों की बीमारियों में भी बेहद कारगर होती हैं। बच्चों को निमोनिया होने पर होम्योपैथ की गोलिया पसली चलने से तो रोकती ही है उनकी इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मददगार होती हैं। होम्योपैथ की दवाएं रोगों को जड़ से खत्म करती है और उनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। होम्योपैथी के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. हैनीमैन के जन्मदिवस दस अप्रैल को हर वर्ष ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ के रूप में मनाते हैं।

होम्योपैथी विभाग के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष त्रिपाठी बताते हैं कि होम्योपैथ की दवाएं संक्रामक के साथ ही गैर संक्रामक बीमारियों में भी असरकारी होती हैं। वैसे तो यह सभी के लिए उपयोगी है लेकिन बच्चों व महिलाओं के उपचार में होम्योपैथी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। वह बताते हैं कि मौसम में परिवर्तन के साथ ही छह माह से अधिक के शिशुओं में निमोनिया अथवा स्वांस से सम्बन्धित रोगों की समस्याएं अधिक होती हैं। इसके अलावा दांत निकलते समय भी उन्हें परेशानियां होती हैं। दस्त व उल्टी से भी वे अक्सर ही परेशान रहते हैं। बच्चों की इन सभी बीमारियों में होम्योपैथ बेहद ही असरकारी होता है। खास कर निमोनिया व स्वांस सम्बन्धित रोग होने पर बच्चों का दम नहीं फूलने देता है। वह बताते है कि छह माह से अधिक के बच्चों को चिकित्सक के परामर्श से अगर होम्योपैथ की दवाएं दी जाएं तो वह उनके इम्यूनिटी को बढ़ाने में मददगार होती है। इससे बच्चे स्वस्थ तो रहते ही है जल्दी बीमार भी नहीं पड़ते है।

डॉ. मनीष बताते हैं कि होम्योपैथ के प्रति लोगों का झुकाव कितनी तेजी से बढ़ा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में स्थिति होम्योपैथ के कुल 15 राजकीय होम्योपैथ चिकित्सालयों में एक वर्ष के भीतर दो लाख  से अधिक मरीज देखे जा चुके हैं। इनमें 30 प्रतिशत बच्चे व 40 प्रतिशत महिलाएं शामिल रही। होम्योपैथ के ये राजकीय होम्योपैथ चिकित्सालय हरहुआ, मुनारी, ह्दयपुर, हिरामनपुर, गोबरहां, नैपुरकला, सीओ, सुल्तानीपुर, कैथी, कोटवा, महगांव के अलावा भेलूपुर, रामनगर, राजघाट व पं. दीन दयाल उपाध्याय चिकित्सालय पाण्डेयपुर में हैं। 

डॉ.  मनीष के अनुसार एलोपैथ, आयुर्वेद तथा प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों की ही तरह होम्योपैथी की भी अपनी अलग विशेषताएं हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण आज होम्योपैथी विश्वभर में 100 से भी अधिक देशों में अपनाई जा रही है। वह कहते हैं कि होम्योपैथ की दवाओं के बारे में आम तौर पर गलत धारणा है कि इनका असर रोगी पर धीरे-धीरे होता है लेकिन इस चिकित्सा प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह रोगों को जड़ से दूर करती है और इन दवाओं के साइड इफेक्ट भी नहीं के बराबर होते हैं।

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