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मंगलवार, 13 फ़रवरी 2024

Ash Wednesday संग शुरु होगा 40 दिनी मसीही समुदाय का महाउपवास काल

माथे पर पवित्र राख से मसीही बनाएंगे क्रूस का निशान

-इस बार देश दुनिया में 14 फरवरी से शुरू होगा महा उपवास

-जानिए क्या है महा उपवास काल, क्यों मनाया जाता है इसे




Varanasi (dil India live). ऐश वेडनेस डे यानी राख बुधवार के साथ ही मसीही समुदाय का 40 दिन का उपवास काल इस बार 14 फरवरी से शुरु होगा। विश्व भर के ईसाई ऐश वेडनेसडे से 40 दिन के उपवास की शुरुआत करते हैं। ऐश वेडनेसडे यानी राख बुधवार प्रभु यीशु के दुख भोग के रुप में मनाया जाता है। इन 40 दिनों तक ईसाई वर्ग प्रभु से प्रार्थना करते हैं। इस दौरान लोग प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हैं। वाराणसी धर्मप्रान्त से जुड़े फादर चंद्रकांत की माने ईसा मसीह ने 40 दिन का व्रत रखा था, उनके 40 दिन के व्रत को त्याग, बलिदान के रुप में मसीही न सिर्फ याद करते हैं बल्कि इन 40 दिनों में मसीही समुदाय ईसा मसीह द्वारा क्रूस पर दिये बलिदान को याद किया जाता है। पादरी बीएन जान कहते हैं कि इसका मकसद प्रभु पर भरोसा करना होता है। इस महा उपवास काल को त्याग और मंथन के रुप में जाना जाता है। इस दौरान मसीही अहंकार को दूर करते हुए जहां पुण्य कार्यों में लगे रहते है वही महाउपवास काल के दौरान गुप्त दान भी खूब किया जाता है।

क्या है ऐश वेडनेस डे

ऐश वेडनेसडे ईसाई समुदाय का वो पवित्र दिन होता है। जिस दिन माथे पर पवित्र राख लगाकर मसीही चालीस दिनी महाउपवास की शुरुआत करते हैं। प्रभु यीशु के प्रति मसीही अपनी आस्था दिखाते हैं। पादरी आदित्य कुमार कहते है कि ऐश वेडनेस डे ईसाई वर्ग के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होता है। ऐश वेडनेस डे से लेंट काल की शुरुआत होती हैं। यह पूरा समय ही आत्म मंथन का होता है, इस चालीस दिन को मसीही प्रभु यीशु के नाम कर देते है, प्रभु की आराधना, गुप्त दान आम हो जाता है।

-मिट्टी में मिल जाओगे

फादर फिलिप्स बताते हैं कि राख बुधवार के दिन कैथलिक ईसाई पवित्र राख से माथे पर क्रूस का निशान बनाते हुए ईसा मसीह को याद करते हैं। इस दौरान पुरोहित माथे पर राख लगाते हुए लोगों को याद दिलाते है कि तुम मिट्टी हो और मिट्टी में मिल जाओगे। इसके साथ लोगों को अंहकार छोड़कर अच्छी सीख दी जाती है।


पास्टर एंड्रू थामस कहते हैं कि पाम संडे, जिसे पैशन संडे के नाम से भी जाना जाता है, इस बार 24 मार्च को है। पाम संडे ईस्टर से पहले का रविवार है और पवित्र सप्ताह की शुरुआत का प्रतीक है, जो ईसाइयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बाद 29 मार्च को गुड फ्राइडे व 31को ईस्टर की मसीही खुशी मनाएंगे।

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