} .post h1, .post-title, .post-title a { color: #CC0000 !important; } .post h2 { color: #222222 !important; border-left: 4px solid #CC0000 !important; padding-left: 8px !important; } .post h3, .post h4 { color: #222222 !important; } }

ब्रेकिंग न्यूज

ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 मध्य प्रदेश के देवास में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को शराब से भरे ट्रक ने कुचला, मौत । 🔴 सेंट मैरीज़ कांवेंट स्कूल कैंटोनमेंट में क्लास 6 से 8 तक के लिए स्कूल के कपाट खुले, तेंदुआ अब भी पकड़ से बाहर। 🔴 भारतीय वायुसेना के 29 वें चीफ बने आशुतोष दिक्षित, पदभार संभाला।। 🔴 नीता अंबानी ने किया 'नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय' का भूमिपूजन, 5,000 से अधिक जरूरतमंदों को मिलेगा अपना घर। 🔴 कल 3 नवंबर को वाराणसी में होगा सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आगमन। 🔴 वाराणसी के मौसम में बदलाव, सुबह सुबह दिखी ठंड के साथ कोहरे की चादर। दिलचस्प खबरों के आप हमारे साथ बनें रहें dil india live news portal

शुक्रवार, 17 सितंबर 2021

पोषण माह: पिंडरा व चोलापुर में चला जागरूकता अभियान

रेसिपी प्रतियोगिता संग अन्नप्राशन एवं गोदभराई की रस्म हुई अदा

वाराणसी 17 सितंबर(दिल इंडिया लाइव)। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से चलाये जा रहे पोषण माह के अन्तर्गत चोलापुर तथा पिंडरा ब्लॉक में पोषण जागरूकता के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके तहत रेसिपी प्रतियोगिता के साथ ही अन्नप्राशन एवं गोदभराई की रस्म कर महिलाओं को जागरूक किया गया। पिंडरा विकासखंड के सीडीपीओ वीके उपाध्याय ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य कुपोषित महिलाओं एवं बच्चों के लिए पुष्टाहार विभाग द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही उन्हें पोषण के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान आयोजित रेसिपी प्रतियोगिता के जरिये उन्हें यह बताने की कोशिश की गयी कि वह किस तरीके का भोजन बनायें, जिससे उन्हें पौष्टिक आहार मिल सके। इसके साथ ही गोदभराई व अन्नप्राशन की रस्म से यह समझाने का प्रयास किया गया कि वह खुद के साथ ही बच्चों के प्रति किस तरह सजग रहें। 


चोलापुर विकासखंड के सीडीपीओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि केंद्रों में मौजूद गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को प्रसव के पूर्व की तैयारी और प्रसव पश्चात की तैयारी के विषय में भी जानकारी दी गयी। सभी लाभार्थी महिलाओं को जीवन चक्र के प्रथम 1,000 दिन यानि गर्भावस्था काल के 270 दिन और जन्म से लेकर 2 साल तक 730 दिन के महत्व के बारे विस्तार से बताया  गया।  इन दिवसों में गर्भवती माता और प्रसव के बाद शिशु की देखभाल बहुत जरूरी होती है, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों को कुपोषण से बचाया जा सके। इसके अलावा महिलाओं को सुरक्षित और संस्थागत प्रसव, संतुलित एवं स्वस्थ आहार, टीकाकरण, प्रसव पूर्व जाँच, परिवार नियोजन एवं अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के बारे में भी विस्तृत रूप से बताया गया। 


कार्यक्रम में काफी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। उन्हें बताया गया की वह किस तरीके का पोशाक आहार लें। उन्हें यह भी समझाया गया कि उनके घरों के आस–पास मिलने वाले सहजन, हरी सब्जियाँ तथा चना इत्यादि में भरपूर पौष्टिकता होती है जिसका लाभ वह आसानी से उठा सकती हैं। इससे न केवल वह खुद बल्कि उनके बच्चे भी स्वस्थ रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को पोषण पोटली भी दी गयी। 

कार्यक्रम में धौरहरा गाँव निवासी मधू, पति- वीरेंद्र ने बताया की उन्हें चार महीने की प्रेगनेन्सी है, विभाग से हमें पूरी जानकारी मिलती रहती है, मुझे किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। धौरहरा की ही निवासी अनीता, पति शशि कुमार ने बताया की उन्हें 3 महीने की प्रेगनेन्सी है। इस कार्यक्रम में शामिल होकर हमें कई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

कोई टिप्पणी नहीं: