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शनिवार, 28 मार्च 2026

Nabi ki Beti जनाबे सैय्यदा Fatema का रौज़ा तोड़े जाने का हुआ काशी में विरोध

हाए जेहरा की सदाओं के साथ निकला जुलूस, उमड़ा हज़ारों का हुजूम



मोहम्मद रिजवान 

dil india live (Varanasi). वाराणसी में अंजुमन हैदरी चौक के तत्वावधान में शहर की मातमी अंजुमनों ने शनिवार को काली महल स्थित शिया मस्जिद से एहतेजाजी अलम का जुलूस निकाला। जुलूस अपने पारम्परिक रास्तों नई सड़क, दालमंडी, चौक, बुलानाला, मैदागिन, विशेश्वरगंज होता हुआ शिया जामा मस्जिद, दारानगर पहुंचकर जलसे में परिवर्तित हो गया। अंजुमन हैदरी के प्रेसिडेंट सैय्यद अब्बास मुर्तुज़ा शम्सी के निर्देशन एवं जनरल सेक्रेटरी नायब रज़ा के संयोजन में चल रहे इस जुलूस में बनारस की सभी मातमी अंजुमनों ने शिरकत की। जुलूस निकलने से पहले काली महल मस्जिद में शाद सीवानी और ज़ैन बनारसी ने अपने कलाम पेश किए। आयोजन में तक़रीर करते हुए मौलाना तौसीफ़ अली ने कहा कि जब रसूल के इस दुनिया से पर्दा फ़रमाने के बाद उनकी इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा फातेमा को इतना सताया गया कि उनको मर्सिया पढ़ना पड़ा और आज से 103 साल पहले मदीना स्थित उनके मक़बरे को ज़मींदोज़ कर दिया गया। आज हम उसी ज़ुल्म के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।



    ज्ञात हो कि आज से 103 वर्ष पूर्व इस्लामी माह शव्वाल की 8 तारीख को सऊदी अरब की तत्कालीन हुकूमत ने पैग़म्बर मुहम्मद (स.) की इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा फातेमा और 4 इमामों की क़ब्रों पर बने आलीशान रौज़ों को बुलडोज़र चला कर गिरा दिया था जिससे पूरी दुनिया में मुहम्मद (स.) के परिवार से आस्था रखने वालों में ग़म और गुस्से की लहर दौड़ गई थी। उसी दौर से आज तक बनारस में अंजुमन हैदरी के तत्वाधान में विरोध स्वरूप यह जुलूस उठाया जाता है और सऊदी सरकार से उन रौज़ों के पुनर्निर्माण की मांग की जाती है। इस मौके पर राष्ट्रपति के नाम हस्ताक्षरित मेमोरेंडम भेजा जाता है कि महामहिम यूनाइटेड नेशन्स के माध्यम से सऊदी अरब की सरकार पर दबाव बनवा कर उन रौज़ों के पुनर्निर्माण का रास्ता सशक्त करें।

    जुलूस में चल रहे हज़ारों अकीदतमंद "आले सऊद होश में आओ.. जेहरा का रौज़ा जल्द बनाओ" की आवाज़ बुलंद कर रहे थे। बनारस के उलेमा की क़यादत में चलने वाला ये जुलूस शिया जामा मस्जिद, दारानगर पहुंच कर जलसे में परिवर्तित हो गया। यहां प्रो. अज़ीज़ हैदर ने अपना कलाम पेश किया। मौलाना सैय्यद हैदर अब्बास, मौलाना तौसीफ़ अली ने तक़रीर करते हुए मदीना में मौजूद जन्नतुल बक़ी नामी क़ब्रिस्तान के एतेहासिक महत्व पर प्रकाश डाला एवं भारत सरकार से मांग किया कि वो उनकी आस्था का मान रखते हुए सऊदी सरकार पर दबाव बनाए और उनकी मांग को पूरा करने की कोशिश करे।

जलसे के बाद मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सैय्यद अमीन हैदर हुसैनी ने कहा कि रसूल और उनके घर वाले ही हमारे लिए सब कुछ हैं। हम उनके ऊपर किसी तरह का ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं कर सकते यही वजह है कि आज 100 साल से ज़्यादा हो गए हम इस जुलूस को निकालकर दुनिया को बताते हैं कि हम ज़ालिम के साथ नहीं बल्कि मज़लूमों के साथ हैं। जलसे का संचालन सैय्यद अब्बास मुर्तज़ा शम्सी ने किया। जुलूस में शहर बनारस की सभी मातमी अंजुमनों समेत अंजुमन हैदरी के सभी पदाधिकारी एवं शहर के मोमिनीन हज़ारों की संख्या में मौजूद थे।

1 टिप्पणी:

Imtiyaz khan ने कहा…

👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻