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शुक्रवार, 13 मार्च 2026

UP main Varanasi ki शिया जामा मस्जिद में अमेरिका और इस्राइल के ख़िलाफ़ उठी आवाज़

अलविदा जुमे की नमाज़ के बाद हुआ यौमुल क़ुद्स का जलसा 



dil india live (Varanasi). अलविदा जुमे की नमाज़ के बाद शिया जामा मस्जिद, दारानगर में यौमुल क़ुद्स मनाया गया। इस मौके पर इमामे जुमा मौलाना ज़फ़र हुसैनी की इमामत में अलविदा जुमे की नमाज़ अदा की गई और बाद में मौलाना की सदारत में ही हुए इस जलसे का आग़ाज़ क़ुरआन पाक की तिलावत से क़ारी इमाम अली ने किया। डॉक्टर शफ़ीक़ हैदर ने जलसे की निज़ामत करते हुए कहा कि मौला अली का फ़रमान है कि ज़ालिमों के ख़िलाफ़ हो जाओ और मज़लूमों के साथ हो जाओ। मौला के फ़रमान पर अमल करते हुए इमाम ख़ुमैनी ने माहे रमज़ान के आख़िरी जुमे को बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी और फिलिस्तीन के मज़लूमों की हिमायत में आवाज़ उठाने का दिन क़रार दिया जो आज सारी दुनिया में मनाया जाता है, और इसी रास्ते पर चलते हुए हमारे रहबरे मोअज़्ज़म आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अपने जान का नज़राना पेश किया और जामे शहादत पिया। दरअसल वो शहीदे राहे क़ुद्स हैं। 


इस अवसर पर मतमदार बनारसी ने अपना कलाम पेश किया। जलसे में तक़रीर करते सैय्यद मुनाज़िर हुसैन मंजू ने कहा कि ये हमारे लिए अफ़सोस की बात है कि आज हमारे क़िब्ला ए अव्वल में नमाज़ पढ़ने पर पाबंदी है लेकिन नामनिहाद मुस्लिम मुल्क ज़ालिमों के हाथ की कठपुतली बने हुए हैं और उनकी हर अच्छी बुरी बात पर उनके मददगार बने हुए हैं। मौलाना सैय्यद अमीन हैदर हुसैनी ने अपनी तक़रीर में मस्जिदे अक़्सा के इतिहास पर प्रकाश डाला साथ ही मीडिया को मुखातिब होते हुए कहा कि आयतुल्लाह ख़ामेनई के बारे में उनको मालूम होना चाहिए कि वो सिर्फ ईरान के सियासी लीडर नहीं थे बल्कि पूरी दुनिया में जहां जहां भी शिया रहते हैं उन सबके सबसे बड़े सुप्रीम लीडर थे और यही वजह है कि आज पूरी दुनिया के शिया उनकी शहादत पर ग़म और ग़ुस्से का इज़हार कर रहे हैं इसलिए हमारी धार्मिक भावनाओं को समझा जाए।

जलसे के बाद मजलिस को ख़िताब करते हुए इमामे जुमा मौलाना ज़फ़र-उल-हुसैनी साहब ने कहा कि इमामे ख़ामेनेई ने अपनी पूरी ज़िंदगी मुसलमानों में आपसी इत्तेहाद पर ज़ोर देते हुए क़ुरबान कर दी। उन्होंने तमाम मुस्लिम उम्मत को गवाह बनाते हुए कहा कि आप सब गवाह रहना हमने अपने एक से एक नायाब हीरे बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी और इस्लामी इक़्तेदार को सर बुलंद करते हुए क़ुरबान कर दिए । इस अवसर पर मौलवी शौकत साहब, हाजी नादिर अली, शब्बीर बनारसी, साबिर फ़राज़ बनारसी, ज़ुल्फ़िकार ज़ैदी समेत सैकड़ों लोग नमाज़े जुमा और यौमुल क़ुद्स के जलसे में एकित्रत हुए। जामा मस्जिद दारानगर के प्रशासनिक सचिव सैय्यद मुनाज़िर हुसैन मंजू ने आये हुए लोगों का शुक्रिया अदा किया।

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