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रविवार, 15 मार्च 2026

UP K Varanasi Main का. विशेश्वर मुखर्जी के सौ साल पूरे होने पराड़कर भवन में हुई जुटान

समाजवाद की लड़ाई के अप्रतिम योद्धा थे बिशु दा : प्रो. दीपक मलिक 



dil india live (Varanasi). कामरेड विशु दा (विशेश्वर मुखर्जी) भारतीय राष्ट्रवाद की आधारभूमि थे। वह धर्मनिरपेक्षता, जनतंत्र और समाजवाद की लड़ाई के अप्रतिम योद्धा थे। पराड़कर स्मृति भवन के सभागार में रविवार को 'का. विशु दा के सौ साल ' विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 

           संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो.दीपक मलिक ने विशु दा को याद करते हुए कहा कि हमें समाजवाद, जनतंत्र और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित संस्कृति की नये सिरे से व्याख्या की ज़रूरत है। इसके लिए जनता को पुनः शिक्षित करना होगा। यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि मौजूदा शासक वर्ग यहुदीवादी इजरायल और पाकिस्तानी साम्प्रदायिकता केन्द्रित माडल में बदलना चाहता है।

उन्होंने कहा कि विशु दा इस मायने में भी याद किये जाएंगे कि भारतीय राष्ट्रवाद की आधारभूमि थे।वह धर्मनिरपेक्षता, जनतंत्र और समाजवाद की लड़ाई के अप्रतिम योद्धा थे। उन्होंने कहा कि रूस्तम सैटिन और विशु दा की जोड़ी ने वाराणसी और पूर्वांचल में लगभग आधी सदी तक सभ्य समाज के निर्माण में लगे हुए थे।



समारोह की अध्यक्षता करते हुए समाजवाद और ट्रेड यूनियन आंदोलन के वरिष्ठ नेता और विचारक विजय नारायण ने कहा कि विशेश्वर मुखर्जी पूर्वांचल ट्रेड यूनियन आंदोलन के पुरोधा थे। वह समाजवादी -साम्यवादी आंदोलन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे। सभा के अंत में दो प्रस्ताव पारित किये गये। जिसमें देश में संविधान प्रदत्त धार्मिक अधिकारों की रक्षा और अमेरिका - इस्राइल की तरफ से ईरान पर हमले की निंदा की गई।

संगोष्ठी को बीएचयू आईटी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आर के मंडल, प्रो असीम मुखर्जी, अमिताभ भट्टाचार्य,कुंवर सुरेश सिंह, संजीव सिंह, एआइटीयूसी के नेता अजय मुखर्जी , भाकपा नेता जयशंकर सिंह, एडवोकेट तनवीर अहमद , उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुनील त्रिपाठी, इंटक के प्रदेश सचिव एसपी श्रीवास्तव,सीटू के देवाशीष, सीपीआई एम एल के मिठाई लाल और सीपीआई के जिला मंत्री लाल बहादुर आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ मोहम्मद आरिफ़ ने किया।