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गुरुवार, 12 मार्च 2026

NSS camp: दूसरा दिन रहा Handicraft Skill के नाम

शिविर में प्रशिक्षुओं को विभिन्न परम्परागत कलाओं का दिया प्रशिक्षण 





dil india live (Varanasi). कंपोजिट विद्यालय, छित्तूपुर खास, बीएचयू, वाराणसी में वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई: 014A द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर का दूसरा दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शिविर का आयोजन डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर की थीम “युवाओं में कौशल विकास” थी, जिसके अंतर्गत शिविर के दूसरे दिन “हस्तकला कौशल” (Handicraft Skill) पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य युवाओं में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की संभावनाओं को विकसित करना था।

हस्तकला कौशल सत्र की अतिथि आर्ट एवं क्राफ्ट प्रोफेशनल, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज प्रशिक्षक  नीतू घोषाल ने स्वयंसेवकों को विभिन्न हस्तकला तकनीकों, जैसे टाई एंड डाई की अलग-अलग तकनीकें, दाबू पेंटिंग, ब्लॉक पेंटिंग तथा सूरज की किरणों तथा अलग अलग पत्तों से रचनात्मक कलात्मक गतिविधियों का स्वयंसेविकाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

उन्होंने बताया कि भारत कई रीजनल स्टाइल के लिए मशहूर है, जिनमें से हर एक के लिए खास सब-स्किल्स की ज़रूरत होती है:

बांधनी (गुजरात/राजस्थान) कपड़े के बहुत छोटे पॉइंट्स को तोड़कर और बांधकर छोटे, मुश्किल डॉटेड पैटर्न बनाना। 
लेहरिया (राजस्थान) एक टेक्निक जिससे तिरछी, लहर जैसी धारियां बनती हैं जो आमतौर पर पगड़ी और साड़ियों के लिए इस्तेमाल होती हैं। 
इकत (ओडिशा/तेलंगाना/गुजरात) एक मुश्किल प्रोसेस जिसमें कपड़े में बुनने से पहले धागे को टाई-डाई किया जाता है। 
सुंगड़ी (तमिलनाडु) इसकी खासियत चमकीले बैकग्राउंड पर छोटे डॉट्स होते हैं, जिनमें अक्सर मेटैलिक बॉर्डर होते हैं।

लंच ब्रेक के बाद दूसरा सत्र दोपहर 2:00 बजे शुरू हुआ। इसमें घोषाल ने बताया कि टाई एंड डाई को एक ज़रूरी हैंडीक्राफ्ट स्किल माना जाता है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करता है और सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखता है। यह एक पॉपुलर क्रिएटिव छोटा बिज़नेस आइडिया है क्योंकि इसमें कम शुरुआती इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होती है और घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के फैशन में इसकी बहुत ज़्यादा डिमांड है।

उन्होंने बताया कि ये  हस्तकला कौशल युवाओं के लिए स्वरोजगार और रोजगार के अनेक अवसर प्रदान करता है। इस क्षेत्र में युवा हैंडमेड उत्पादों का निर्माण कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, प्रदर्शनियों, स्थानीय बाजारों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपनी आय का स्रोत विकसित कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपनी रचनात्मकता को व्यवसायिक रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर डॉ. शशि प्रभा कश्यप ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे कौशल युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे इस प्रकार के कौशलों को सीखकर समाज में भी जागरूकता फैलाएँ तथा उसके बाद डॉ. कश्यप ने अतिथि प्रशिक्षक श्रीमती घोषाल को धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में 50 एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया और विभिन्न हस्तकला गतिविधियों में अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक रहा तथा सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर की गतिविधियों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ। शिविर का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

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