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गुरुवार, 28 मई 2026

Urdu Adab k महान शायर बशीर बद्र हमारे बीच नहीं रहे

ईदुल अजहा के दिन 91 वर्ष की आयु में भोपाल में निधन

dil india live (Bhopal). उर्दू शायरी की दुनिया के महान शायर बशीर बद्र आज हमारे बीच नहीं रहे। 91 वर्ष की आयु में भोपाल में ईदुल अजहा के मुकद्दस दिन उनका निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और डिमेंशिया से जूझ रहे थे। बशीर बद्र साहब ने ग़ज़ल को सिर्फ़ अदब की महफ़िलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आम लोगों के दिलों तक पहुँचा दिया। उनकी शायरी में मोहब्बत, तन्हाई, रिश्ते, दर्द और इंसानी एहसास बेहद सादगी और गहराई से दिखाई देते हैं। 

कुछ अमर शेर जो हर दिल की आवाज़ हैं

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी

यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो

न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में

उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक विरासत रहेगी। 

श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ पंक्तियाँ

अल्फ़ाज़ के उस फ़नकार को सलाम
जिसने दर्द को भी ख़ूबसूरती से लिखा
महफ़िलें ख़ामोश होंगी अब शायद
पर हर दिल में बशीर बद्र हमेशा रहेंगे ज़िंदा।। 

(सुमंगला सुमन) 

 


मुशायरों में, उनको कई बार सुना

आम बोलचाल की भाषा में लिखे बशीर बद्र के शेर ज़िन्दगी की गहरी सच्चाई बयान करते। कई-कई बार लोकसभा में, उनके शेर सुनाई दिये। कम लोगों को पता होगा कि बशीर बद्र ने अटल बिहारी वाजपेयी के लिए लखनऊ में भी चुनाव प्रचार किया था।

उनके शेर जो मुझे पसंद हैं: वो ये हैं... 
“दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, 
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों” 
“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, 
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में” 
“बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना, 
दरिया जहाँ समंदर से मिला, दरिया नहीं रहता” 
“कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी, 
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता” 
"जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है, 
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा" 
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, 
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए”
(वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार एके लारी)

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