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गुरुवार, 11 मार्च 2021

shabe meraj 2021: लो आ गई इबादत की रात

आज रखा जा रहा है रोज़ा, पूरी रात होगी इबादत

वाराणसी (दिल इंडिया लाइव) इस्लामी त्योहारो में शब-ए-मेराज का  खासा महत्व है। यह हर साल इस्लामिक महीने रजब की 27वीं तारीख को मनाया जाता है। 

आज ही शब-ए-मेराज की रात है। इस्लाम में ऐसा माना जाता है कि रजब के महीने की 27 वीं तारीख को पैगंबर-ए-इस्लाम (अल्लाह के रसूल) हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से मिलने मेराज गये थे।जहाँ पर नबी कि रब से मुलाकात हुई थी। इसीलिए इस रात को 'पाक रात' भी कहा जाता है। शब-ए-मेराज एक अरबी शब्द है, अरबी में शब का मतलब रात और मेराज का मतलब आसमान होता है। इस्लामी किताबो में है कि मेराज कि शब  हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने सऊदी अरब के शहर मक्का से येरुसलम  की बैत उल मुकद्दस मस्जिद तक का सफर तय किया था, और फिर बैत उल मुकद्दस मस्जिद से सातों आसमान की सैर करते हुए अल्लाह से मिलने गये थे। यह सब इतने कम वक्त में हुआ कि इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता कि नबी रब से मिलकर चले आये और उनके घर के दरवाज़े कि कुंडी जाते वक्त जो हिल रही थी वो लौटने पर भी हिल रही थी। यह भी रब का एक मोजिज़ा ही था।

ये है शब-ए-मेराज का इतिहास

शब-ए-मेराज भी नबी के मोजज़ो में से एक माना जाता है। इस रात  हज़रत मोहम्मद (स.) ने न सिर्फ मक्का से येरुशलम का सफर किया, बल्कि सातों आसमानों की यात्रा की और आखिर में सिदरत-ए-मुंतहा (जहां तक पैगंबर-ए-इस्लाम के अलावा कोई इंसान या अवतार नहीं जा सका) के पास उनकी मुलाकात अल्लाह से हुई. तभी से इस शब यानी शब-ए-मेराज का मुस्लिम जश्न मनाते है।

रखा जाता है रोज़ा

इस्लाम में शब-ए-मेराज की रात की बड़ी फजीलत (खूबी) है, कहा जाता है कि जो इस दिन रोजा रखता है, उसे बड़ा सवाब मिलता है. जो इंसान इस रात अल्लाह की इबादत करता है और कुरान की तिलावत (पढ़ना) करता है, उसे कई रातों की इबादत करने वाले के बराबर सवाब मिलता है। इस रात को खास नमाज़ और नबी पर दूरूद (सलाम) पढ़ा जाता है।

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