} .post h1, .post-title, .post-title a { color: #CC0000 !important; } .post h2 { color: #222222 !important; border-left: 4px solid #CC0000 !important; padding-left: 8px !important; } .post h3, .post h4 { color: #222222 !important; } }

ब्रेकिंग न्यूज

ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 ।CBSC ने दसवीं व बारहवीं के बोर्ड एग्जाम का जारी किया शिडयूल, 16 फरवरी होगा इंतहान । 🔴 वाराणसी निवासी डाक्टर शाह मेराज अहमद बनें समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, वाराणसी में हर्ष। 🔴 छठ के पहले शहर के घाटों को साफ़ करने व सजाने की तैयारियां। 🔴 वाराणसी में चोलापुर के गुरवट गांव में शव रखकर मुख्य मार्ग जाम करने वाले 47 लोगों पर 8 धाराओं में मुकदमा पंजीकृत । 🔴 मां अन्नपूर्णा के दिव्य दर्शन के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब, दस नवंबर तक मिलेगा खजाने का प्रसाद । 🔴 पूर्वांचल की सड़कों पर धनतेरस की खरीदारी करने उमड़ा जनसैलाब। ताज़ा अपडेट के लिए बनें रहें हमारे साथ dil india live news portal
05 November 2026 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
05 November 2026 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 5 नवंबर 2026

Education News: Bhartiya Gyan Parampara और आधुनिक नवाचार पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी, 11 राज्यों के प्रतिभागियों ने की सहभागिता

Gangapur Campus MGKVP university news2026

@dil india live 

(Varanasi). महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के महाराजा (डॉ.) विभूति नारायण सिंह गंगापुर परिसर स्थित राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक नवाचार’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश के 11 राज्यों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने की। मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्याल प्रबंध अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी तथा विशिष्ट अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. तेज प्रताप सिंह रहे। मुख्य वक्ता प्रो. बंशीधर पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर विचार व्यक्त किया।


भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी विरासत 

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत का आधार है। इसे आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार से जोड़कर समकालीन चुनौतियों के समाधान की दिशा में कार्य करना आवश्यक है।

मुख्य अतिथि प्रो. आशीष बाजपेयी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित नैतिकता, नेतृत्व, प्रबंधन एवं सामूहिक विकास के सिद्धांत आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। भारतीय चिंतन और आधुनिक तकनीक के समन्वय से विकास की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।


विशिष्ट अतिथि प्रो. तेज प्रताप सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा के सामाजिक, राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन शासन व्यवस्था, लोककल्याण और सहभागिता की अवधारणाएं वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी प्रासंगिक हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान, दर्शन

मुख्य वक्ता प्रो. बंशीधर पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान, दर्शन, प्रकृति और मानव जीवन से संबंधित व्यापक दृष्टिकोण समाहित है। इस ज्ञान का वैज्ञानिक एवं अनुसंधानपरक अध्ययन कर इसे आधुनिक नवाचारों से जोड़ने की आवश्यकता है।


राष्ट्रीय संगोष्ठी की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में एक सारांशिका, तीन संकलित पुस्तकों तथा एक शोध पत्रिका के विशेषांक का प्रकाशन किया गया। इन प्रकाशनों के माध्यम से संगोष्ठी में प्रस्तुत शोधपत्रों, विचारों एवं अकादमिक विमर्श को स्थायी स्वरूप प्रदान किया गया। 11 राज्यों के प्रतिभागियों की सहभागिता और अकादमिक प्रकाशनों की उपलब्धि ने संगोष्ठी की राष्ट्रीय स्तर पर सफलता को रेखांकित किया।



कार्यक्रम के सफल आयोजन में परिसर प्रभारी डॉ. मनीष कुमार सिंह का मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. राम प्रकाश सिंह यादव, सह-संयोजक डॉ. अविनाश सिंह, आयोजन सचिव डॉ. सर्वेश मिश्रा एवं डॉ. पुरुषोत्तम लाल विजय तथा कोषाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार रहे। तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में डॉ. सुमित घोष एवं डॉ. बेबी चौरसिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक नवाचार के विभिन्न पहलुओं पर सार्थक विमर्श किया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।