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सोमवार, 12 जनवरी 2026

Education: विवेकानंद जयंती पर VKM Varanasi में मनाया गया युवा दिवस

युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण की नींव -सारिका दुबे एडवोकेट 





dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय युवा दिवस पर वसंत कन्या महाविद्यालय, कामाख्या, वाराणसी में एक कार्यक्रम NSS प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. शशि प्रभा कश्यप, यूनिट: A द्वारा आयोजित किया गया और इसका विषय था "राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका" था। इसी विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस अवसर पर, कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रचना श्रीवास्तव ने NSS स्वयंसेवकों को संबोधित किया और उनसे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का पालन करने का आग्रह किया।

इस दौरान मुख्य अतिथि खुशी की उड़ान की संस्थापक एडवोकेट सारिका दुबे ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण की नींव है और युवाओं को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में पता होना चाहिए। एडवोकेट सारिका दुबे ने कहा, "युवा शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति है। उन्हें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और समाज के लिए बेहतर भविष्य बनाने में योगदान देना चाहिए।"
प्रतियोगिता में 12 स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जिनमें से 3 को पुरस्कार दिया गया। पहला पुरस्कार भाग्य ज्योति को, दूसरा श्रेया को और तीसरा सौम्या को दिया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन दो NSS स्वयंसेवकों ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शशि प्रभा कश्यप ने दिया। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में कई शिक्षण स्टाफ, 156 छात्र और NSS स्वयंसेविकाएं उपस्थित थीं।

प्रो. राकेश उपाध्याय का व्याख्यान 

वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा द्वारा 12 जनवरी 2026 को युवा दिवस पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “Self-Development & Mental Health” रहा। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. राकेश के. उपाध्याय, निदेशक, भाषा पत्रकारिता, भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में हुआ। अपने संबोधन में प्राचार्या ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवाओं के लिए आत्मविकास और मानसिक स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा और तेज़ जीवनशैली के इस दौर में मानसिक संतुलन बनाए रखना ही वास्तविक सफलता की कुंजी है।



मुख्य वक्ता प्रो. राकेश के. उपाध्याय का व्याख्यान अत्यंत इंटरएक्टिव और संवादात्मक रहा, जिसमें छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने कहा कि युवा अवस्था व्यक्तित्व निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने आत्मचिंतन, आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच को मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख आधार बताते हुए छात्राओं को जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

प्रो. उपाध्याय ने स्वामी विवेकानंद को “Communicator par Excellence” बताते हुए कहा कि संप्रेषण जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कौशल है। उन्होंने कहा, “आप क्या जानते हैं, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना महत्वपूर्ण यह है कि आप उसे दूसरों तक कैसे पहुँचा पाते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की शुरुआत स्वयं की श्वास-प्रश्वास (Breathing Exercises) से होती है, क्योंकि सही श्वसन से मन और शरीर दोनों संतुलित रहते हैं। भारतीय संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सभी संस्कृतियों की जड़ और सार है, और हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए।

प्रो. उपाध्याय ने छात्राओं को कौशल विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “आज के समय में नौकरी डिग्री से नहीं, बल्कि कौशल से मिलती है।” उन्होंने छात्राओं को अपनी क्षमताओं को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने अद्वैत वेदांत पर भी प्रकाश डालते हुए आत्मबोध और आत्मचेतना के महत्व को रेखांकित किया तथा इसे मानसिक शांति और आत्मविकास से जोड़ा।

कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की यूथ कमेटी द्वारा किया गया, जिसमें समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों की भी सक्रिय उपस्थिति रही। इस अवसर पर महाविद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं और उन्होंने व्याख्यान को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया।

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