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शुक्रवार, 5 अगस्त 2022

Moharram 5th: पांचवीं मोहर्रम पर पेश हुआ आंसुओं का नजराना

मारा गया हैं तीर से बच्चा रबाब का, बच्चा भी वो था जो दिल था रबाब का...


Varanasi (dil india live). कहती थी ये शीरी खुले सर हाय ए हुसैना, किस शान से मेहमां मेरे घर आये हुसैना....व, मारा गया हैं तीर से बच्चा रबाब का, बच्चा भी वो था जो दिल था रबाब का...। यह दर्द भरा नौहा जब दरगाहें फातमान में शहनाई की धुनों पर गूंजा तो बरबस ही लोगों के ज़ेहन में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की याद ताजा हो गई।

दरअसल पांचवीं मोहर्रम को भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां शहनाई के जरिए कर्बला के शहीदों को आंसुओं का नजराना पेश करते थे। पांचवीं मोहर्रम को यह रवायत एक बार फिर अदा की गई। इस दौरान उस्ताद के परिवार के आफाक हैदर खाँ, ज़ाकिर हुसैन, उस्ताद नाज़िम हुसैन, नासिर अब्बास, अखलाक हुसैन आदि ने शहनाई के जारिए आंसुओं का नजराना पेश किया। यहां कार्यक्रम का संचालन शकील अहमद जादूगर ने किया।

इससे पूर्व वक्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली, छत्तातला, गोविंदपुरा से अलम का जुलूस उठया मुनाजिर हुसैन मंजू की अगुवाई में उठाया गया। जुलूस से पूर्व मुजफ्फरपुर के मर्सिया ख्वां वज्जन खां के बेटे ने सवारी पढी। इसके अलावा जुलूस में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के परिजनों ने शहनाई पर मातमी धुन पेश किया। जुलूस विभिन्न क्षेत्रों से होता हुआ दरगाहें फातमान पहुंच कर सम्पन्न हुआ।

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