} .post h1, .post-title, .post-title a { color: #CC0000 !important; } .post h2 { color: #222222 !important; border-left: 4px solid #CC0000 !important; padding-left: 8px !important; } .post h3, .post h4 { color: #222222 !important; } }

ब्रेकिंग न्यूज

ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 मध्य प्रदेश के देवास में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को शराब से भरे ट्रक ने कुचला, मौत । 🔴 सेंट मैरीज़ कांवेंट स्कूल कैंटोनमेंट में क्लास 6 से 8 तक के लिए स्कूल के कपाट खुले, तेंदुआ अब भी पकड़ से बाहर। 🔴 भारतीय वायुसेना के 29 वें चीफ बने आशुतोष दिक्षित, पदभार संभाला।। 🔴 नीता अंबानी ने किया 'नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय' का भूमिपूजन, 5,000 से अधिक जरूरतमंदों को मिलेगा अपना घर। 🔴 कल 3 नवंबर को वाराणसी में होगा सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आगमन। 🔴 वाराणसी के मौसम में बदलाव, सुबह सुबह दिखी ठंड के साथ कोहरे की चादर। दिलचस्प खबरों के आप हमारे साथ बनें रहें dil india live news portal

रविवार, 29 दिसंबर 2024

Khwaja Garib Nawaz के 813 वें उर्स का आगाज, बुलंद दरवाजे पर फहरा झंडा


  • Mohd Rizwan 
Ajmer (dil India live).अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर झंडा फहराने के साथ ही ख़्वाजा के 813 वें उर्स का आगाज हो गया। भीलवाड़ा के लाल मोहम्मद गौरी के परिवार ने ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह स्थित ऐतिहासिक बुलंद दरवाजे पर झंडे की रस्म पूरी की। झंडे की रस्म के दौरान हजारों की संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

दरगाह के खादिम हसन हाशमी ने बताया कि सरकार गरीब नवाज की दरगाह में सदियों से झंडा चढ़ाए जाने की रस्म अदा की जा रही है। इसी के तहत आज भी बुलंद दरवाजे पर झंडा फहराया गया इसे गौरी परिवार ने पूरा किया है। उन्होंने आगे कहा, यह मन्नत का झंडा है जो लंबे समय से ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में हर साल चढ़ाया जाता है। आज से उर्स की शुरुआत हो चुकी है। हम ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह से यही संदेश देते हैं कि चाहे वह किसी भी धर्म से क्यों न हो। हमारा यही मानना है कि वह यहां आए अपनी मुराद पूरी करे।

दरअसल, ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर झंडे की रस्म को भीलवाड़ा का गौरी परिवार पूरा करता है। गौरी परिवार के अनुसार, यह परंपरा काफी साल से चली आ रही है। साल 1928 से फखरुद्दीन गौरी के पीर-मुर्शिद अब्दुल सत्तार बादशाह ने झंडे की रस्म को शुरु किया था। इसके बाद 1944 से उनके दादा लाल मोहम्मद गौरी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके निधन के बाद साल 1991 से उनके बेटे मोईनुद्दीन गौरी ने इस रस्म को निभाया। हालांकि, साल 2007 से फखरुद्दीन गौरी इस रस्म को अदा कर रहे हैं।

बताया जाता है कि वर्षों पहले जब बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाया जाता था तो यह झंडा आस-पास के गांवों तक नजर आता था। हालांकि, वक्त के साथ आबादी बढ़ती चली गई मकानों के बनने से यह नजारा कम ही दिखाई देता है।

कोई टिप्पणी नहीं: