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मंगलवार, 10 दिसंबर 2024

Khwaja Garib Nawaz की दरगाह के समर्थन में निकला जुलूस, याचिका वापस लेने की मांग

देश दुनिया के लाखों करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र है अजमेर

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को भेजा पत्रक 


Bilaspur (dil India live)। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह सरकार गरीब नवाज की दरगाह के खिलाफ दी गई याचिका के विरोध में एक शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ में आस्था रखने वाले सभी धर्म के लोग शामिल हुए। जुलूस में शामिल लोगों ने जुलूस के बाद एक पत्रक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि को भेजकर याचिका वापस लेने की पुरजोर मांग की।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह भारतीय उपमहाद्वीप में सूफी संस्कृति और धार्मिक सौहार्द का प्रतीक है। लगभग 813 वर्षों से यह दरगाह लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, जहां न केवल भारत से, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु अपनी श्रद्धा व्यक्त करने आते हैं। दरगाह पर सभी धर्मों के लोग आते हैं और यहां की संस्कृति विविधता और एकता को प्रकट करती है। यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बिलासपुर में भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा से प्रारंभ हुआ, जो संविधान के आदर्शों का पालन करते हुए सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक था। मौन जुलूस के माध्यम से, समुदाय ने यह संदेश दिया कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खिलाफ याचिका दायर करना न केवल धार्मिक आस्थाओं का अपमान है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ भी है। आशिकाने गरीब नवाज कमेटी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अपील की गई कि याचिका को तुरंत वापस लिया जाए, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने से बचाया जा सके।

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