एनी बेसेंट के जीवन का मूल उद्देश्य था 'सर्वधर्म समभाव' एवं 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को चरितार्थ करना- प्रो. रचना श्रीवास्तव
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(Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में संस्था की संस्थापक एनी बेसेंट की 179वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर भाषण प्रतियोगिता एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां एनी बेसेंट की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके की गई। इसके बाद प्रो. आशा यादव द्वारा रचित एनी प्रशस्ति गीत का सस्वर गायन प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का स्वागत किया एवं मां एनी बेसेंट के सद्कार्यों का अनुसरण करने को कहा। आगे उन्होंने महाविद्यालय के छात्राओं को सम्बोधित करते हुए एनी बेसेंट के जीवन से क्या-क्या सीख सकते हैं? इस विषय पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हमारा कार्य ही मां एनी बेसेंट के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और इस महाविद्यालय के प्रति सच्चा समर्पण होगा। मां एनी बेसेंट को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 'सर्वधर्म समभाव' एवं 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को चरितार्थ करना उनके जीवन का मूल उद्देश्य था।
इस अवसर पर उन्होंने एनी बेसेंट के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण कार्यों एवं उपलब्धियों को बताया। हम सब उन्हें भारतीय राष्ट्रवादी नेता, समाजसेवी एवं थियोसोफिकल सोसायटी के निर्माता के रूप में जानते हैं इन कार्यों के अलावा उन्होंने मानवता की सच्ची सेवा के लिए अनेक कार्य किये। अपने वक्तव्य में उन्होंने एनी बेसेंट के जीवन से कुछ प्रेरक घटनाओं को भी साझा किया।
चित्र कला प्रतियोगिता की ये रही विजेता
इस अवसर पर भाषण प्रतियोगिता एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। भाषण प्रतियोगिता में कुल ४१ प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया, जबकि चित्रकला प्रतियोगिता में पच्चीस प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। चित्रकला प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष कल्पना आनन्द एवं चित्रकला विभाग की विभागाध्यक्षा दीक्षा जायसवाल ने सर्वसम्मति से परिणाम की घोषणा की, जिसमें विद्लेई मित्रा (चित्रकला प्रथम वर्ष) ने प्रथम स्थान, स्मृद्धि श्रीवास्तव (चित्रकला, तृतीय वर्ष) ने द्वितीय स्थान एवं आर्या यादव (समाजशास्त्र द्वितीय वर्ष) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन एवं संचालन दर्शन शास्त्र विभाग की सहायक आचार्य डा. प्रतिमा सिंह ने किया।
इनकी रही खास मौजूदगी
महाविद्यालय की प्रबंधक उमा भट्टाचार्या, हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. आशा यादव, दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. ममता मिश्रा, अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. इंदु उपाध्याय, अंग्रेजी विभाग से प्रो. निहारिका लाल, संगीत विभाग से प्रो. सीमा वर्मा, गृह विज्ञान विभाग से संगीता देवरिया, इतिहास विभाग से प्रो. पूनम पांडेय, प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग से डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव के अलावा प्रो. सपना भूषण, प्रो. शशि कला, डॉ. श्वेता सिंह, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. पूर्णिमा सिंह, डॉ. सुप्रिया सिंह, डॉ. शशि, डॉ. प्रीति विश्वकर्मा, डॉ. सुबोध कुमार, डॉ. दीपक कुमार के साथ सैकड़ों छात्राएं उपस्थित थीं।
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