मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

VKM kamacha में Navaratri festival: मातृशक्ति’ का भव्य आयोजन

महोत्सव में नवरात्रि के धार्मिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्त्व पर डाला प्रकाश
VKM Varanasi: Navaratri festival news October 2026

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(Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में 13 अक्टूबर, 2026 को नवरात्रि के पर महिला अध्ययन प्रकोष्ठ ‘उड़ान’ एवं युवा समिति के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘नवरात्रि महोत्सव : मातृशक्ति’ का भव्य आयोजन किया गया। महाविद्यालय के संगोष्ठी कक्ष में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति में नारी-शक्ति के महत्त्व को रेखांकित करना, मातृशक्ति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना तथा छात्राओं में आत्मविश्वास, स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में आध्यात्मिकता, साहित्य, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मनोहारी समन्वय देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं सांस्कृतिक वातावरण के मध्य हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव मुख्य अतिथि डॉ. रागिनी सरना महाविद्यालय की प्रबंधक उमा भट्टाचार्य तथा अश्विनी का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। संस्कृत विभाग की ओर से प्रस्तुत मंगलाचरण ने सभागार को भक्तिमय वातावरण से अभिभूत कर दिया। वैदिक एवं आध्यात्मिक परंपरा से अनुप्राणित इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम के मूल भाव मातृशक्ति की आराधना और नारी-सम्मान को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की।

कार्यक्रम के आरंभ में प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को अनुशासन, कर्तव्यबोध और सदाचार के महत्त्व से परिचित कराया। उन्होंने छात्राओं को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हुए सत्कर्म करने तथा जीवन में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को छात्राओं के व्यक्तित्व-विकास, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना के संवर्धन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बताया।

VKM Varanasi: Navaratri festival news 13 October 2026

इसके पश्चात् मुख्य अतिथि डॉ. रागिनी सरना का सम्मान किया गया। वे महाविद्यालय की पूर्व छात्रा भी रही हैं। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को एक विशेष आत्मीयता प्रदान की। कार्यक्रम में अश्विनी का भी सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के माध्यम से अतिथियों के प्रति आदर एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई।

संस्कृत विभाग की अध्यक्ष डॉ. शांता चटर्जी ने अपने संबोधन में नवरात्रि के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मातृशक्ति की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए नारी के सामर्थ्य, आत्मसम्मान और स्वावलंबन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल देवी-आराधना का पर्व नहीं, बल्कि नारी के भीतर निहित शक्ति, साहस, करुणा और सृजनात्मकता को पहचानने का अवसर भी है। उनके प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित जनसमुदाय को नारी-सशक्तीकरण के व्यापक अर्थ पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम की सांस्कृतिक श्रृंखला  में छात्राओं ने विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा को सजीव किया। देबांगना ने देव-स्तुति की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यशस्वी सिंह ने अपनी काव्य-प्रस्तुति के माध्यम से भावों और संवेदनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति की। अर्कजा राठौर की एकल नृत्य-प्रस्तुति ने अपनी कलात्मकता और भावाभिव्यक्ति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। संगीत विभाग की छात्रा हिमांशी ने सुमधुर गायन प्रस्तुत कर कार्यक्रम में संगीतात्मक माधुर्य का संचार किया। आराध्या मिश्रा की काव्य-प्रस्तुति ने भी साहित्यिक संवेदना और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रभावशाली स्वर प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त सामूहिक नृत्य-प्रस्तुति ने भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की सामूहिकता, लयात्मकता और सौंदर्य को अभिव्यक्त किया। छात्राओं की इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, आत्माभिव्यक्ति और व्यक्तित्व-विकास का सशक्त साधन भी है।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण मुख्य अतिथि डॉ. रागिनी सरना की सुमधुर सांगीतिक प्रस्तुति रही। उनकी प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महाविद्यालय से उनके आत्मीय संबंध ने इस अवसर को और भी स्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में धनुषी की नृत्य-प्रस्तुति के साथ भव्य समापन हुआ। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की इस विविध श्रृंखला ने आयोजन को भावपूर्ण, मनोरंजक और प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉक्टर अनुराधा बापुली ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, प्राचार्या, प्रबंधक, शिक्षकों, आयोजन समिति तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. अनुराधा बापुली के मार्गदर्शन एवं समन्वय में आयोजन सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। 


महिला अध्ययन प्रकोष्ठ ‘उड़ान’ एवं युवा समिति के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित इस महोत्सव ने भारतीय संस्कृति में नारी की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। भारतीय परंपरा में मातृशक्ति को सृजन, संवेदना, संरक्षण और शक्ति का प्रतीक माना गया है। माँ, बहन, बेटी, शिक्षिका और समाज-निर्मात्री के रूप में नारी परिवार से लेकर राष्ट्र के विकास तक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान समय में नारी-सम्मान, समान अवसर, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना अत्यंत आवश्यक है। इस दृष्टि से यह आयोजन सांस्कृतिक चेतना के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण के संदेश को प्रसारित करने का प्रभावी माध्यम बना।

समग्र रूप से ‘नवरात्रि महोत्सव : मातृशक्ति’ कार्यक्रम भक्ति, साहित्य, संगीत और नृत्य का सुंदर संगम रहा। इस आयोजन ने छात्राओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, नारी-अस्मिता और आत्मसम्मान के प्रति जागरूकता विकसित करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ एवं युवा समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे। महाविद्यालय का यह आयोजन नारी-शक्ति के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सशक्तीकरण की भावना को अभिव्यक्त करने वाला एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रयास सिद्ध हुआ।

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