पूर्वाग्रह से मुक्त होकर करें तथ्यों का विश्लेषण: प्रो. आनंद शंकर
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(Varanasi). वाराणसी में डीएवी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग द्वारा सोमवार को प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर चौधरी ने कहा कि इतिहास विज्ञान है, न कम न ज्यादा। विज्ञान से अलग होते ही इतिहास मात्र कहानी बनकर रह जाता है। हड़प्पा सभ्यता के पतन और कालीबंगा के अवशेषों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक तथ्य वैज्ञानिक पद्धति से ही प्रमाणित होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पूर्वाग्रह से मुक्त होकर साक्ष्यों का विश्लेषण करने और नए तथ्यों के आलोक में पुरानी धारणाएं बदलने के लिए तैयार रहने की सलाह दी।
प्रो. चौधरी ने कहा कि इतिहास गहन चिंतन और बहुआयामी दृष्टि विकसित करता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अंतर्विषयी सोच के अनुरूप है। सिविल सेवा, संग्रहालय, पुरातत्व और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में इतिहास के विद्यार्थियों के लिए सम्मानजनक रोजगार के व्यापक अवसर हैं।
विशिष्ट अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवेश भारद्वाज ने कहा कि मानव का जन्म ही इतिहास का जन्म है। इतिहास अब केवल राजाओं का नहीं, बल्कि माली और बुनकर जैसे सामान्य जन का भी है। उन्होंने कहा कि इतिहास को समझने के लिए इतिहासकार के सामाजिक-आर्थिक परिवेश का अध्ययन भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम में खेलों का इतिहास, भारतीय ज्ञान परंपरा और काशी का इतिहास जैसे विषय शामिल किए गए हैं। अध्यक्षता कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने की।
स्वागत डॉ. सोमनाथ पाठक, विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने विषय स्थापना की। संचालन डॉ. शिव नारायण एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजय कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रतिभा मिश्र, डॉ. शशिकांत यादव सहित विभाग के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


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