गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

postel department news: Post Card ने पूरा किया 157 साल का सफर, मनाया गया world post card day

विभिन्न आंदोलनों का गवाह रहा है 1 अक्टूबर 1869 को ऑस्ट्रिया में जारी हुआ पोस्टकार्ड

डाकिए की दस्तक से डिजिटल संदेशों तक, बदलते संचार का साक्षी रहा पोस्टकार्ड-पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव



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(Ahmedabad) (Indian postel department) घर के दरवाजे पर डाकिए की दस्तक और उसके हाथ में थमा पोस्टकार्ड कभी पूरे परिवार के लिए उत्सुकता का विषय हुआ करता था। पोस्टकार्ड पर लिखे कुछ शब्द दूर बैठे किसी अपने की आवाज जैसे लगते थे। यही कारण था कि पोस्टकार्ड सिर्फ कागज का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि भावनाओं और रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बन गया था। समय के साथ संचार के साधन बदलते गए। टेलीफोन, पेजर, मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने संदेशों को पलभर में पहुंचाना शुरू कर दिया। इसके बावजूद पोस्टकार्ड की ऐतिहासिक और भावनात्मक स्मृति आज भी कायम है। तमाम राजनेताओं से लेकर साहित्यकारों व आंदोलनकारियों ने पोस्टकार्ड का बखूबी प्रयोग किया है। अपना वही पोस्टकार्ड 1 अक्टूबर, 2026 को वैश्विक स्तर पर 157  साल का हो गया। भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी, पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, दुनिया में पहला पोस्टकार्ड  एक अक्तूबर 1869 को ऑस्ट्रिया में जारी किया गया था।

इसके पीछे की कहानी के बारे में पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि, पोस्टकार्ड का विचार सबसे पहले ऑस्ट्रियाई प्रतिनिधि कोल्बेंस्टीनर के दिमाग में आया था, जिन्होंने इसके बारे में वीनर न्योस्टॉ में सैन्य अकादमी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. एमैनुएल हर्मेन को बताया। उन्हें यह विचार काफी आकर्षक लगा और उन्होंने 26 जनवरी 1869 को एक अखबार में इसके बारे में लेख लिखा। ऑस्ट्रिया के डाक मंत्रालय ने इस विचार पर बहुत तेजी से काम किया और पोस्टकार्ड की पहली प्रति एक अक्तूबर 1869 में जारी की गई। यहीं से पोस्टकार्ड के सफर की शुरुआत हुई। दुनिया का यह प्रथम पोस्टकार्ड पीले रंग का था।  इसका आकार 122 मिलीमीटर लंबा और 85 मिलीमीटर चौड़ा था।  इसके एक तरफ पता लिखने के लिए जगह छोड़ी गई थी, जबकि दूसरी तरफ संदेश लिखने के लिए खाली जगह छोड़ी गई।  

भारत में डाक सेवाओं पर निरंतर अध्ययनरत एवं 'इण्डिया पोस्ट : 150 ग्लोरियस ईयर्ज़' के लेखक पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि भारत में पहला पोस्टकार्ड 1879 में जारी किया गया।  हल्के भूरे रंग में छपे इस पहले पोस्टकार्ड की कीमत 3 पैसे थी और इस कार्ड पर ‘ईस्ट इण्डिया पोस्टकार्ड’ छपा था। बीच में ग्रेट ब्रिटेन का राजचिह्न मुद्रित था और ऊपर की तरफ दाएं कोने मे लाल-भूरे रंग में छपी ताज पहने साम्राज्ञी विक्टोरिया की मुखाकृति थी। अंदाज़-ए-बयां का यह  माध्यम लोगों को इतना पसंद आया कि साल की पहली तीन तिमाही में ही लगभग 7.5 लाख रुपए के पोस्टकार्ड बेचे गए थे। 

 डाकघरों में अब तक चार प्रकार के पोस्टकार्ड

डाकघरों में अब तक चार प्रकार के पोस्टकार्ड उपलब्ध रहे। इनमें मेघदूत पोस्टकार्ड, सामान्य पोस्टकार्ड, मुद्रित पोस्टकार्ड और प्रतियोगिता पोस्टकार्ड उपलब्ध रहे हैं, जिनकी कीमत क्रमशः 25 पैसे, 50 पैसे, 6 रुपये और 10 रुपये थी। 20 दिसंबर 2024 से इन सभी श्रेणियों को एकीकृत कर एकल “पोस्टकार्ड” श्रेणी में सम्मिलित कर दिया गया है। 

पोस्ट कार्ड ने बनाया नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड 

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि गुजरात के कृषि, किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग के तत्वावधान में डाक विभाग के सहयोग से गत वर्ष अक्टूबर, 2025 में अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर एक अनूठे ‘धन्यवाद पोस्टकार्ड अभियान’ का आयोजन कर विश्व स्तर पर एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इस अभियान के तहत गुजरात के नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करते हुए 1.11 करोड़ से अधिक पोस्टकार्ड लिखे। यह अभियान पोस्टकार्ड की सामूहिक अभिव्यक्ति की क्षमता और जनभागीदारी का एक उल्लेखनीय उदाहरण बना।

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