अपने इल्म से मुर्दों को जिंदा कर दिया करते थे गौसे आज़म
अमनपुरी कालोनी, अर्दली बाज़ार समेत कई जगहों पर जश्ने गौसुलवरा की रही धूम
- @dil india live
(Varanasi). रबीउल आखिर के आखिरी सप्ताह में सरकार हज़रत गौसे-पाक की महफिलों का सिलसिला तेज हो गया। जगह जगह ग्यारहवीं शरीफ़ की महफ़िलें सजायी गई और नके तबर्रुक का लंगर लोगों ने चखा। अर्दली बाज़ार में हाजी कबीर के दौलतखाने पर तकरीर करते हुए मौलाना इमरान अत्तारी ने इल्म दीन हासिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितने भी अल्लाह के वली है वो सब इल्म के बूते वली बने। कोई जाहिल वली नहीं बन सकता। वली बनने के लिए इल्म ज़रुरी है। जहां तक करामात का सवाल है जो अल्लाह के वली होते हैं वो अपने इल्म और अल्लाह की रज़ा से करामात दिखाते हैं। गौसे आज़म मुर्दों को जिंदा कर दिया करते थे। वो अपनी ताकत से नहीं रब के दिए अख्तियार से मुर्दों को जिंदा कर दिया करते थे। यहां नातिया कलाम और नबी पर सलाम भी पेश किया गया और लंगर चला।
इससे पहले मो. शफाहतुल्लाह व हशमतुल्लाह राजू की अगुवाई में उल्फत कंपाउंड अर्दली बाजार में जश्ने गौसुलवरा का आयोजन मौलाना इलियास कादरी साहब की अगुवाई व मुफ्ती महमूद आलम की सदारत में किया गया। जश्न में मस्जिद उल्फत बीबी के इमाम हाफिज रमजान अली ने नातिया कलाम पेश किया।
मोहम्मद दाउद, हाजी फारुख खां, राज, अमन आदि ने आये हुए लोगों का स्वागत क रहे थे। यहां हज़रत गौसे आज़म की करामात, उनके मर्तबे और उनकी तालीम पर मौलाना इलियास कादरी व मुफ्ती महमूद आलम ने बारीकी से रौशनी डाली। नबी पर सलाम के बाद लंगरे गौसिया का एहतमाम किया गया।
उधर अमनपुरी कालोनी में स्कूल प्रिंसिपल मोहम्मद आमिर की अगुवाई में जश्ने गौसुलवरा का आगाज़ पाक कुरान की तेलावत से हुआ वहीं मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना हाफ़िज़ मुबारक हुसैन ने लोगों को खेताब करते हुए कहा कि रब को राज़ी करना चाहते हो तो गौसे आज़म के रास्ते पर चलो और उनकी दी हुई तालीम से फ़ैज़ उठाओ।
मौलाना हाफ़िज़ मुबारक हुसैन ने अपनी दलीलों से साबित किया कि गौसे आज़म का रास्ता ही अमन, मोहब्बत और आखिरत की कामयाबी का रास्ता है। उन्होंने तमाम लोगों से सरकार गौसे आज़म के दिखाए रास्ते पर चलने की वकालत की। इस दौरान दीन, दुनिया और आखिरत संवारने के लिए नमाज़ की पाबंदी, भूखे को खाना खिलाने, जरुरतमंद की जरूरत पूरी करने और कैदी की मदद करने पर भी उन्होंने जोर दिया। मौलाना ने कहा कि इस तरह की महफ़िल कुछ सीखने और उससे सबक लेने के लिए होती हैं। इन महफिलों से जलसों से लोग दीन की बातें सीखते हैं और नेकी की राह पर चलते हैं।तकरीर के बाद मिलाद शरीफ हुआ व नमाज़े ज़ोहर भी जमात से अदा की गई।
इनकी रही खास मौजूदगी
अब्दुल समद, शमसुद्दीन बाबू, फैसल सगीर, अब्दुल कयूम, खालिद रहमान, अनवर अहमद, शाकिर सिद्दीकी बब्लू आदि मौजूद थे।
फिजा में गूंजे दुआओं के बोल
गौसे पाक की महफ़िल में दुआएं मांगी गईं कि अल्लाह अपने हबीब के सदके में हम सबकी दीन, दुनिया और आखिरत संवार दे, हमारा मुल्क तरक्की करें, मुल्क में अमन और सुकुन रहे... आमीन। इस दौरान लोगों ने लंगर का लुत्फ उठाया। आखिर में मोहम्मद आमिर ने आए हुए मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
ऐसे ही उल्फत कंपाउंड, डिठोरी महाल, मकबूल आलम रोड, गौरीगंज, शिवाला, नवाबगंज, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब आदि में भी जश्ने गौसुलवरा का आयोजन किया गया।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें