शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

Congress Pradesh Adhyaksh ajay Rai: कुर्सी गई, तेवर नहीं... अजय राय की सियासत में अभी कई मोड़ बाकी

“सियासत की राह में मंज़िलें बदलती रहती हैं, मगर कुछ किरदार अपने तेवर से पहचाने जाते हैं।”

@dil india live 

  • रोहित चतुर्वेदी

(Varanasi). वाराणसी। अजय राय की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से विदाई सिर्फ संगठन में बदलाव नहीं, पूर्वांचल की सियासत में एक चर्चित अध्याय का बदलना भी है। भूमिहार समाज से आने वाले अजय राय की पहचान पूर्वांचल के दबंग तेवर और बाहुबली छवि वाले जमीनी नेता की रही है। कांग्रेस में आने के बाद इसी तेवर को उन्होंने संगठन खड़ा करने में लगाया। जिलों में अपनी टीम तैयार की, पुराने और नए नेताओं का संतुलन साधा और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश की। खुद अजय राय ने भी संगठन में पुराने-नए को साथ लेकर चलने की रणनीति की बात कही थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनका लगातार मुखर रहना उनकी सियासी पहचान का बड़ा हिस्सा रहा। 2024 में वाराणसी में मोदी की जीत जरूर हुई, लेकिन अजय राय को मिले 4.60 लाख से अधिक वोट और घटा हुआ जीत का अंतर भी चुनावी चर्चा का बड़ा विषय रहा। 2019 में जीत का अंतर करीब 4.79 लाख था, जो 2024 में घटकर करीब 1.52 लाख रह गया।

अब संगठन की कमान बदल गई है, लेकिन अजय राय की सियासी पारी खत्म होती नहीं दिखती। गांधी परिवार के साथ उनके अच्छे राजनीतिक रिश्ते और पार्टी में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए आगे उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिले, इसकी संभावनाओं पर भी नजर रहेगी। हालांकि यह फिलहाल भविष्य की बात है।

पूर्वांचल की राजनीति में अजय राय की अपनी जगह है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं कि उनके बाद संगठन कौन संभालेगा, बल्कि यह भी है कि उनके बनाए नेटवर्क और राजनीतिक ऊर्जा को कांग्रेस किस तरह आगे ले जाती है। सियासत लंबी पारी का खेल है... अजय राय के सफर में प्रदेश अध्यक्ष का अध्याय जरूर बंद हुआ है, लेकिन आगे अभी कई मोड़ आना बाकी हैं।

👉 अजय राय के कार्यकाल पर वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार रोहित चतुर्वेदी की त्वरित टिप्पणी ।

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