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शुक्रवार, 21 मार्च 2025

शबे कद्र आज रात, पूरी रात जो चाहो मांग लो आज

पूरी रात होगी इबादत, मांगी जायेगी दुआएं

Varanasi (dil India live)। आज शबे कद्र की रात है, आज पूरी रात इबादत होगी, रोज़ेदार पूरी रात जागकर इबादत में मशगूल रहेंगे। दरअसल माहे रमजान के आखिरी दस दिनों की पांच रातों में से कोई एक रात शबे कद्र की रात होती है। इस रात में लोग जागकर रब की इबादत करते हैं। इस्लाम में इस रात को हजार रातों से अफजल बताया गया है। इसलिए रोजेदार ही नहीं बल्कि हर कोई इस रात में इबादत कर अल्लाह से खुसूसी दुआ मांगता है।

हज़ार रातों से अफज़ल है शबे कद्र की रात

रमज़ान महीने के आखरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27, 29 की शब। इममें से कोई एक शबेकद्र की रात होती है। यह रात हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। इस रात में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। इसमें महिलाएं और बच्चे भी घरों में इबादत करते दिखाई देते हैं। मौलाना निज़ामुददीन चतुर्वेदी कहते हैं कि कुरान में बताया गया है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह रात बड़ी बरकतों वाली रात होती है। यह रात बड़ी ही चमकदार होती है व सुबह सूरज बिना किरणों के ही निकलता है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में कुबूल होती है।

दो अशरा हुआ पूरा

मौलाना साकीबुल कादरी कहते हैं कि रमज़ान महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहले अशरा रहमत, दूसरे को मगफिरत व तीसरे अशरे को जहन्नुम से आजादी का अशरा कहा जाता है। प्रत्येक अशरा दस दिन का होता है। आज 20 रोज़ा पूरा होने के साथ ही दूसरा अशरा मगफ़िरत का भी मुकम्मल हो जाएगा और तीसरा अशरा जहन्नुम से आज़ादी का शुरु होगा।

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