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सोमवार, 24 मार्च 2025

Ramzan mubarak (23)- jannat का एक दरवाजा है 'Rayyan' जिसमें से रोज़ादार होंगे जन्नत में दाखिल

जिसने पूरे महीने रोज़ा रखा उसे नहीं खा पाएगी जहन्नुम की आग

Varanasi (dil India live). रमजान मुबारक कितनी अजमत, कितनी रहमत और कितनी बरकत वाला महीना है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रमज़ान का आगाज़ होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। हर तरफ नूर ही नूर की बारिश हो रही होती है।

रमजान के तीन अशरों की हर दस दिन की अलग ही अहमियत है। रब ने रमज़ान को तीन अशरों (10-10 दिनों के तीन हिस्सों) में बांटा है। इसमें पहला अशरा रहमत का होता है। अशरा दस दिन को कहते हैं। पहले दस दिन तक रोज़ा रखने वाले पर रब की रहमत बरसती है। रमजान का रहमत का सफर पूरा होने के बाद दूसरा अशरा मगफिरत का आता है। दूसरे आशरे में रब बंदों की मगफिरत कर देता है। यानी तमाम गुनाह माफ कर देता है ये दोनों अशरे बीत चुके हैं। और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का चल रहा है। इस आखिरी अशरे में अल्लाह रोज़ेदारों को जहन्नुम से आज़ाद कर देता है।

इस्लामिक ग्रंथों में आया है कि जन्नत में यूं तो कई दरवाजे हैं मगर एक खास दरवाजा जिसका नाम बांबे रय्यान है। उस दरवाजे से जन्नत में केवल रोज़ादार ही दाखिल होंगे। रमजान की आहट से ही जन्नत सजायी जाने लगती है। यानी रमज़ान में रब के पास जाने वाला जन्नत का हकदार होता है। और वो रोजेदार बांबे रय्यान से ही जन्नत में दाखिल होंगे। इसलिए कहा जाता है कि रोजेदारों को जहन्नुम की आग नहीं खा पाएगी। इस महीने की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि इस मुक़द्दस महीने को रब ने अपना महीना कहा है। रब कहता है ग्यारह महीना बंदा अपने हिसाब से गुज़ारता है। रमजान का एक महीना मेरे लिए जो गुजारेगा उसका बदला उसे में दुनिया और आखिरत दोनों में दूंगा। ऐ मेरे रब तू अपने हबीब के सदके में रमज़ान की दौलतों से मालामाल कर दें। और जो लोग रोज़ा नहीं रख रहे हैं उन्हें रोज़ा रखने की तौफीक अता फरमा (आमीन).

  • डाक्टर एहतेशामुल हक 
सदर सुल्तान क्लब वाराणसी।


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