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शुक्रवार, 28 मार्च 2025

Eid Mubarak (2)-इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म

ईद का मतलब वो खुशी का त्योहार जो बार-बार आए

Varanasi (dil India live )। अरबी में किसी चीज़ के बार-बार आने को उद कहा जाता है उद से ही ईद बनी है। ईद का मतलब ही वो त्योहार है जो बार-बार आये। यानी जिसने रोज़ा रखा है उसके लिए ईद बार-बार आएगी।


ईद तोहफा है उनके लिए जिन्होंने एक महीना अपने आपको अल्लाह के लिए वक्फ कर दिया। यही वजह है कि रमज़ान और ईद एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर रमज़ान होता और ईद न होती तो हमें शायद इतनी खुशी न होती। इस्लाम कहता है कि रमज़ान के बाद जब ईद आये तो इस बात का पता करो कहीं कोई रो तो नहीं रहा है, कोई ऐसा घर तो नहीं बचा है जहां ईद के लिए सेवईयां न हो। कोई पड़ोसी भूखा तो नहीं है। अगर ऐसा है तो उसकी मदद करना हर साहिबे नेसाब पर वाजिब है।

खासकर छोटे-छोटे बच्चे जिन्हें किसी से कोई लेना देना नहीं होता मगर वो इसलिए खुश होते हैं कि रमज़ान खत्म होते ही ईद आयेगी, ईदी मिलेगी। इसे ईद-उल-फित्र भी कहते हैं क्यों कि इसमें फितरे के तौर पर 2 किलों 45 ग्राम गेंहू जो हम खाते हो उसके दाम के हिसाब से घर के तमाम सदस्यों को सदाका-ए-फित्र निकालना होता है। दरअसल ईद उसकी है जिसने रमज़ान भर इबादत किया और कामयाबी से रमज़ान के पूरे रोज़े रखे। नबी-ए-करीम (स.) ईद सादगी से मनाया करते थे। इसलिए इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म है। इसलिए ईद आये तो सभी में आप खुशियां बांटे, सबको खुशी दें, बच्चों को ईदी दें, एक दूसरे से गले मिले, मुसाफा करें और दिली खुशी का इज़हार करें। सही मायने में तभी आपकी ईद होगी। अल्लाह रब्बुल इज्जत सभी मुसलमानों को रमज़ान का रोज़ा रखने, पांचों वक्त नमाज और इबादत करने की तौफीक दे, और बदले में सभी की ईद हो जाये...आमीन।

{डा. मोहम्मद हम्ज़ा, चिकित्सक व सामाजिक कार्यकर्ता}

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