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मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

Khwaja Moinuddin Chishty का जानिए कब है उर्स

21 दिसंबर को दिखा चांद तो ख़्वाजा का 814 वां उर्स 27 दिसंबर को 

अजमेर दरगाह में ख्वाजा की जियारत को पहुंचते हैं देश दुनिया से जायरीन 





Mohd Rizwan 

dil india live (ajmer).  अजमेर शरीफ (राजस्थान) में हर साल आयोजित होने वाले 'उर्स-ए-ख्वाज़ा' की तैयारियां तेज हो चली है। उर्स के दौरान ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) की दरगाह पर दुनिया भर से जायरीन पहुंच कर मन्नतें व मुराद के साथ ही चादरपोशी करते है। हर साल रजब का चांद दिखने के बाद अजमेर में उर्स का आगाज होता है। इस साल 2025 में 814 वां उर्स (814th Urs) मनाया जाएगा। उर्स की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होगी। अगर जमादीउल आखिर का चांद 21 दिसंबर को दिख गया तो रजब महीने की शुरुआत के साथ ही छह दिखनी उर्स अजमेर में शुरू हो जाएगा 27 दिसंबर को ख़्वाजा मुईनुद्दीन अहमद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का छठवीं का कुल होगा और चादरपोशी की जाएगी, अगर चांद नहीं दिखा तो 28 को ख़्वाजा की छठी मनाई जाएगी। 


एक रजब को खुलेगा जन्नती दरवाजा

उर्स के मौके पर पूरे 6 दिनों के लिए एक रजब को जन्नती दरवाजा (Jannat Door) खोला जाता है। 21 दिसंबर को चांद रात है चांद का दीदार हो जाएगा तो जायरीन के लिए जन्नती दरवाजे को खोल दिया जाएगा। अगर किसी कारण 21 दिसंबर 2025 को चांद का दीदार नहीं हो पाता है तो अगले दिन 22 दिसंबर 2025 को जन्नती दरवाजा खोला जाएगा।जायरीन के लिए यह मौका बहुत खास होता है। ऐसा माना जाता है कि, इस दरवाज़े से गुजरने पर इंसान की दुआ कुबूल होती है, उसे रूहानी बरकत और जन्नत हासिल होती है। इसलिए लोगों को इस दरवाजे के भीतर प्रवेश करने का इंतजार रहता है। उर्स के दौरान दुनिया भर से अजमेर पहुंच कर जायरीन हजरत ख्वाजा गरीब नवाज में अपनी अकीदत दिखाते हैं और खुद को खुशकिस्मत समझते हैं। इसके पीछे एक कहावत भी है कि...

 "इरादें रोज़ बनते हैं, इरादें टूट जाते हैं, 
वही अजमेर जाते है जिन्हें ख़्वाजा बुलाते हैं।"

यानी वो लोग खुशकिस्मत होते हैं जिन्हें ख़्वाजा के दरबार में पहुंचने का शरफ हासिल होता है। 

राजस्थान के अजमेर शरीफ में उर्स का आयोजन हर साल इस्लामिक कैलेंडर (Islamic Calendar) के अनुसार, रजब के महीने मनाया जाता है। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, उर्स की शुरुआत झंडा चढ़ाने (परचम कुशाई) की रस्म के साथ होती है। बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने के बाद उर्स की औपचारिक रूप से शुरुआत हो जाती है। झंडा चढ़ाने की रस्म भीलवाड़ा के गौरी परिवार द्वारा अदा की जाती है। साल 1944 से लेकर अब तक भीलवाड़ा का गौरी परिवार अजमेर उर्स में झंडे की रस्म अदा कर रहा है। इस बार परचम कल फहराया जाएगा। देखें उर्स का पूरा कार्यक्रम...


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