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शनिवार, 30 अगस्त 2025

UP K Varanasi Main बिजली कर्मियों को तीन माह से वेतन नहीं मिलने से आक्रोश

जब तक निजीकरण निरस्त नहीं होता बिजली कर्मियों का आंदोलन रहेगा जारी 

समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां हो वापस

सरफराज अहमद 

Varanasi (dil India live). बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 276 वें दिन भी बनारस के बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं की भांति व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

 कहा  कि निजीकरण किये जाने के लिए बिजली कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस न लिये जाने से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि कई हजार बिजली कर्मियों को 3 माह से वेतन नहीं दिया गया है जो पूरी तरह अमानवीय है। यह बिजली कर्मी तीन माह से वेतन न मिलने पर भी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं फिर भी उन्हें वेतन न देना उत्पीड़न की पराकाष्ठा है। विगत 9 माह से निजीकरण के विरोध में चल रहे बिजली कर्मियों के आंदोलन से खीझा हुआ प्रबंधन बड़े पैमाने पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां कर दमन पर उतर आया है। 

 


 वक्ताओ ने बताया कि हजारो  बिजली कर्मियों के तीन माह से वेतन रोकने के उपरांत भी बिजली के निजीकरण के विरुद्ध बिजलिकर्मियो का जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी है साथ ही ये भी कहा कि उत्पीड़नात्मतक कार्यवाहिओ से निजीकरण स्वीकार नही करेगा बिजलीकर्मी।

      वक्ताओ ने कहा कि बिजली कर्मियों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं होती।

           विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि फेसियल अटेंडेंस के नाम पर कई हजार बिजली कर्मचारियों को जून और जुलाई माह का वेतन अभी तक नहीं दिया गया है। अगस्त का महीना भी समाप्त हो रहा है और यदि इन बिजली कर्मचारियों को लगातार तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाता तो यह बहुत ही गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है और पूरी तरह अमानवीय है। 

     


वक्ताओ ने कहा कि निजीकरण के नाम पर मई के महीने में अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छटनी की गई थी। कई हजार संविदा कर्मी 55 वर्ष की आयु के नाम पर निकाले गए और कई हजार संविदा कर्मियों को डाउन साइजिंग करके हटा दिया गया। ध्यान रहे की संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से विभिन्न जनपदों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

       


उत्पीड़न के नाम पर कई हजार बिजली कर्मचारियों को सर्वोच्च न्यायालय की गाइड लाइन के विपरीत दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया। यहां तक कि महिला कर्मियों को मात्र इसलिए दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया कि वे संघर्ष समिति की कार्यालय समय के उपरान्त होने वाली मीटिंगों में आ रही थीं।

      सभा को सर्वश्री ई. मायाशंकर तिवारी, ई. एस.के. सिंह, ई. नीरज बिंद, अंकुर पाण्डेय, सतेंद्र सुमन, अरुण गुप्ता, नन्हे कुमार, सुशांत गौतम, एस.के. भूषण,योगेंद्र कुमार, बृजेश यादव, पंकज यादव, रंजीत कुमार, अनिल यादव, रमाकांत पटेल आदि ने संबोधित किया।

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