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शनिवार, 31 मई 2025

Varanasi main Hazrat Laat Shahi Baba के उर्स में जुटे लोग

तीन दिवसीय उर्स के दूसरे रोज मन्नतें व मुराद मांगने उमड़ा हुजूम 

Varanasi (dil India live)। सर्किट हाउस स्थित हज़रत सैय्यद मुख्तार अली शाह शहीद उर्फ लाटशाही बाबा (रह.) का तीन दिवसीय उर्स शुक्रवार को फजर की नमाज के बाद शुरू हो गया साथ। उर्स के दौरान बाबा के दर पर अकीदत का सैलाब उमड़ा हुआ था। शनिवार की रात से रविवार की सुबह तक जायरीन बाबा के दर पर अपनी अकीदत लुटाते दिखाई देंगे। जुमेरात को शुरू हुए उर्स में जुटे को दूसरे दिन आलम यह था कि सर्किट हाउस में फातेहा, मन्नत व मुराद मांगने लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। 

आज चढ़ेगी सरकारी चादर

शनिवार शाम को सूफी जाफर हसनी के उल्फत बीबी के हाता सिथत दौलतखाने से चादर-गागर का जुलूस निकलेगा, जो कदीमी रास्ते से होता हुआ बाबा के आस्ताने पर पहुंचेगा। मगरिब की नमाज़ के बाद बाबा की मजार पर चादरपोशी कर तमाम अकीदतमंद मुल्क की सलामती व खुशहाली की दुआएं मांगेंगे। तीन दिवसीय उर्स के दौरान कुरानख्वानी, फातेहा व लंगर का दौर दूसरे दिन भी चलता रहा। 

बाबा चेतसिंह के थे सिपहसालार 


सूफी जाफर की मानें तो हज़रत लाटशाही शहीद बाबा (रह.) का असली नाम सैय्यद मुख्तार अली शाह था। बाबा फतेहपुर के रहने वाले थे। हज़रत लाटशाही बाबा सन् 1742 में बनारस आए। आप काशी नरेश के शिवपुर परगना के शहर काजी बनाएं गये। राजा चेतसिंह ने बाबा के इंसाफ और बहादुरी के चलते अपनी सल्तनत में सिपहसालार बनाया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1782, 1784 व 1786 में राजा चेतसिंह की ओर से जंग लड़ी। जंग में अंग्रेजों ने अपनी हार मानते हुए संधि की। इसके बाद अंग्रेजों की ओर से दूसरा गवर्नर भेजा गया। 1798 में उसने धोखे से जंग छेड़ दी। इस जंग में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए सैय्यद मुख्तार अली शाह लाटशाही बाबा शहीद हो गए। राजा चेतसिंह की ओर से उन्हें लार्ड गवर्नर नियुक्त होने के कारण इनका नाम बाद में लाटशाही बाबा पड़ गया। डाक्टर हम्ज़ा की मानें तो आज बाबा को मानने वाले देश दुनिया में फैले हुए हैं। उर्स के दौरान बाबा से अकीदत रखने वाले देश के कोने कोने से कचहरी, अर्दली बाजार व पक्की बाजार पहुंचते हैं। उर्स के दौरान इन इलाकों के तक़रीबन सभी घरों में मेहमान उमड़ते हैं। बनारस के वरुणापार का कोई देश के किसी भी इलाके में रहता हो मगर उर्स के बहाने वो बनारस खींचा चला आता है।

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