आधुनिकता की दौड़ में सांस्कृतिक पहचान और जीवन मूल्यों का संरक्षण जरूरी: प्रो. डायना रॉस
मानसिक शांति का आधार है ध्यान और योगा
@dil india live
(Varanasi). अमेरिका के ओहायो स्थित ऑटरबाइन विश्वविद्यालय की प्रो. डायना रॉस ने केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ में विशेष व्याख्यान को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान व जीवन मूल्यों का संरक्षण भी बेहद ज़रूरी है। सजगता, आत्मचिंतन और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति मानसिक संतुलन एवं आंतरिक शांति प्राप्त कर सकता है।
संस्थान के विद्यार्थी सेवा केंद्र की ओर से अनाथपिंड अतिथि गृह में 'आधुनिकता को अपनाते हुए सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण' विषय पर आयोजित व्याख्यान में प्रो. रॉस ने कहा कि आलस्य, भय और चिंता व्यक्ति को अपने वास्तविक मूल्यों एवं क्षमताओं को समझने से रोकते हैं।
प्रो. डायना रॉस ने केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ में आयोजित विशेष व्याख्यान में कहा कि ध्यान और सजगता का नियमित अभ्यास आत्मबोध, मानसिक स्थिरता और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मचिंतन के माध्यम से जीवन के प्रश्नों का समाधान खोजने तथा प्रसन्नता और शांति के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का परिचय विद्यार्थी सेवा केंद्र के सचिव डॉ. तेनजिन शेनफेन ने दिया। विद्यार्थी अधिष्ठाता एवं केंद्र के अध्यक्ष गेशे तेनजिन नोरबू तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वेलबीइंग सेंटर की समन्वयक प्रो. निशात अफरोज उपस्थित रहीं।
हिंदी विभाग की डॉ. ज्योति सिंह ने अतिथियों का पारंपरिक खटक एवं संस्थान की पुस्तकों से स्वागत किया। शिक्षण सहायक वेन. देचेन वांग्मो ने धन्यवाद ज्ञापित किया। व्याख्यान में 60 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की।




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