'लोलार्क छठ', पर उमड़ा आस्था-विश्वास का अपार जनसैलाब
- @dil india live
Sanjana Srivastava
Varanasi (वाराणसी). काशी को देवी-देवताओं के अनुमानित आदिकालीन ठौर-ठिकानों में गिना जाता है। लेकिन देवादिदेव महादेव की नगरी होने का ख़िताब काशी को शर्तिया तौर पर हासिल है। कहते हैं काशी में शिव का निवास, अमूमन, दो स्थानों पर होता है । एक है 12 ज्योतिर्लिंगों में से शिवलिंग रूप में विराजत काशी विश्वनाथ जी का 'काशी विश्नाथ मंदिर' और दूसरा स्थान है समाधि व् स्थूल या मूर्तिवत स्वरुप बाबा कीनाराम जी का 'बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड'। भगवान् शिव की रुद्र मुद्रा को परिभाषित करता, अघोर परंपरा का, यह आदि-अनादि कालीन सिद्धपीठ 'बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड' आध्यात्मिक क्षेत्र का सिरमौर है।
'लोलार्क छठ' (लोलार्क षष्ठी) 17 सितंबर को अपार जनसमुदाय की उपस्थिति में अगाध श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । 17 सितंबर को सुबह आश्रम परिसर की साफ़-सफ़ाई और दैनिक आरती के बाद इंतज़ार शुरू हुआ बाबा कीनाराम, अघोरेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान् राम जी सहित परिसर में मौज़ूद अनेकों समाधि और बाबा कीनाराम के पुनरगामित स्वरुप और इस सिद्धपीठ के वर्तमान (11वें) पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के दर्शन का, जब सुबह हुई तो हमेशा की तरह नज़ारा अद्भुत था। शिव के मूर्तिवत व् समाधि रुप के साथ-साथ शिव की स्थूल काया के वर्तमान स्वरुप को देखने की ललक हज़ारों दर्शनार्थियों के चेहरे पर साफ़ दिख रही थी। यहां एक ज़िक़्र प्रासंगिक है। वो ये है कि अध्यात्मिक शोध व समझ आधार पर भक्तजनों के बीच एक आम धारणा पुष्ट हो चली है कि अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम कोई और नहीं बल्कि स्वयं अघोराचार्य बाबा कीनाराम का पुनरगामित स्वरुप हैं। ज़ाहिर है ये अविश्वसनीय दृश्य होता है। ऐसे में सुबह 9 बजे सम्पूर्ण संसार में समस्त अघोर परंपरा के सर्वमान्य आचार्य-ईष्ट-आराध्य तथा शिव की स्थूल काया माने जाने वाले बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जैसे ही अपने कक्ष से बाहर आए तो घंटा-डमरु -शंख और 'हर हर महादेव' के निनाद के साथ पूरा अघोर परिसर गगनभेदी उदघोष से गूँज उठा। अघोरपीठ में श्रद्धालुओं के बीच अजीब सी हलचल, लेकिन सौम्य अनुशासन बरक़रार रहा ।
और फ़िर सभी औपचारिक पूजा-अर्चना के बाद अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जैसे ही अपने विश्वविख्यात औघड़ तख़्त पर विराजमान हुए, कतारबद्ध श्रद्धालुओं के बीच, अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिये होड़ मच गयी। लेकिन अति अनुशासित संयमित आस्थावानों की भीड़ ने अपना संयम नहीं खोया और लाइन में एक-एक कर अपने आराध्य का और परिसर में मौज़ूद बाबा कीनाराम, अघोरेश्वर महाप्रभु सहित सभी समाधियों का दर्शन पूजन किया और श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया ।
इस घोर आध्यात्मिक पर्व के मौक़े पर समाजिक संस्थान 'अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान' की 'महिला मण्डल' की तरफ़ से समाजिक सरोकार का एक कार्यक्रम, 'रक्तदान शिविर', का भी आयोजन किया गया जिसमें काफी लोगों ने स्वेक्षा से रक्तदान किया।
दिखाई दिया मेले जैसा नजारा
आश्रम परिसर के बाहर एक विशाल मेले का दृश्य था। सैकड़ों दुकानों के बीच, ख़रीददारी करते हज़ारों लोग दिखे। इधर अनुमानित भीड़ का आकलन करते हुए स्थानीय प्रशासन ने 2 दिन पहले से ही क़मर क़स लिया था। प्रशासनिक अधिकारी, आश्रम प्रबंधन के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए थे। हर तरफ़ सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था थी, जिसके चलते पूरा कार्यक्रम सकुशल, शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।



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