गुरुवार, 24 सितंबर 2026

URS Mubarak का आगाज़, रौशनी से नहा उठा Hazrat Maulana Shah Baba का दर

चढ़ेगी सरकारी चादर, सज गया मौलाना शाह बाबा का दर 

अस्थाई दुकाने लगी, हाजिरी लगाने जायरीन दे रहे है दस्तक


@dil india live

Mohd Rizwan/ Wasim Hashmi 

(Varanasi)। कोयला बाजार स्थित हजरत सैय्यद मोहम्मद शाह वारिस रसूलेनुमा (मौलाना शाह बाबा) का सालाना उर्स पूरी अक़ीदत के साथ पिछले दिनों शुरू हो गया। उर्स में सभी मज़हब के लोग हाजिरी लगाने पहुंचे हुए थे। अकीदतमंदों की मानें तो मौलाना शाह बाबा को रसुलेनुमा कहा जाता है। माना जाता है कि बाबा के दर पर जो आता है वो अपनी झोली भर के जाता है। 29 सितंबर तक चलने वाले उर्स में बाबा का दर अक़ीदतमंदों से गुलज़ार है। बाबा के दर पर अस्थाई दुकाने सज गयी हैं। आस्ताने के प्रबंधक ने बताया कि उर्स में फुलवारी शरीफ के सज्जादानशीं भी आते हैं। उर्स में काफी लोग उनकी दुआएं लेने उमड़ते हैं।

मिल्लत का मरकज़ है बाबा का दर

कोयला बाज़ार के सुग्गा गड़ही स्थित बाबा का दर मिल्लत व गंगा जमुनी तहज़ीब का मरकज़ है। उर्स में जुमेरात को लोगों का हुजुम फातेहा पढ़ता दिखाई दिया। इस दौरान सभी मज़हब के लोग पहुंच कर उर्स में हाज़िरी लगाते दिखाई दिये। बाबा के चाहने वाले फातेहा पढ़ने के साथ ही वहां लगी अस्थाई दुकाने से खरीददारी करके उर्स से वापस लौटते हैं।


बनारस में सूफिज़्म का है प्रमुख केन्द्र 

मौलाना शाह बाबा ने दुनिया को सूफिज्म का सीधा सच्चा रास्ता दिखाया था। यही वजह है कि धर्म और मज़हब के झगड़ों से दूर यहां सभी अपनी परेशानी दूर करने के लिए पहुंचते हैं। सभी मज़हब की हाज़िरी इस बात की दलील है कि बाबा किसी एक के नहीं बल्कि सभी के हैं। बनारस में सूफिज्म का ये दर प्रमुख केन्द्र है।


जानिए कौन हैं मौलाना शाह बाबा 

कोयला बाजार स्थित हजरत मौलाना शाह सैय्यद मोहम्मद वारिस रसूलेनुमा (1087-1166 हिजरी) बनारस में सूफिज्म की प्रमुख कड़ी समझें जाते हैं। यह स्थान गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है, मज़ार स्थल और आसपास के इलाक़े को 'मौलवी जी का बाड़ा' के नाम से जाना जाता है। जो आदमपुरा वार्ड में कोयला बाजार के घनी आबादी वाले मुहल्ले में है। यह बाड़ा अपनी पुरानी परंपराओं और प्रथाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। मौलवी जी का बड़े में कुतुब शाह सैय्यद रहमतुल्लाह अलैह की वर्षगांठ समारोह 12 से 14 वीं रबी-उसानी को आयोजित किया जाता है और इसे शानदार पैमाने पर मनाया जाता है। इसमें फुलवारी शरीफ पटना के सज्जादानशीन खासतौर से शिरकत करते हैं। उर्स के दौरान यहां चादर और गागर लेकर तमाम लोग आते हैं। मगरिब की नमाज के बाद तबरुक (प्रसाद) के साथ गागर पेश करते हुए वे अपनी मन्नत पूरी करने की दुआएं मांगते हैं। रवायत के तहत खुशबू, गुलाब-जल और चंदन के साथ बाबा का गुस्ल किया है और चादर पोशी की जाती है। 

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